स्पेक्ट्रम (Spectrum) क्या होता है?

स्पेक्ट्रम (Spectrum) के विषय में जानकारी

स्पेक्ट्रम के बारे में सुनते ही जनता के दिमाग में 2G स्पेक्ट्रम घोटाले की छवि आ जाती है, जिसे मीडिया द्वारा बहुत ही हाईलाइट किया गया था | उस समय यह प्रश्न दिमाग में उठता था कि यह स्पेक्ट्रम है क्या, फिर समाचार पत्रों और टीवी चैनलों से यह जानकारी मिली कि यह मोबाइल फोन के नेटवर्क से सम्बंधित है, यदि आपको स्पेक्ट्रम (Spectrum) के बारे में जानकारी नहीं है, तो इस पेज पर स्पेक्ट्रम (Spectrum) क्या होता है, टेलीकॉम (DoT) स्पेक्ट्रम नीलामी के विषय में बताया जा रहा है |

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सर्वप्रथम स्पेक्ट्रम शब्द का प्रयोग

सन् 1666 ई. में आइजेक न्यूटन एक बंद कमरे में बैठे थे। उस कमरे में एक खिड़की लगी हुई थी। इस खिड़की के छिद्र से सूर्य की किरण आ रही थी | यह किरण एक प्रिज़्म से होकर पर्दे पर जा रही थी परदे पर यह सात रंगों में दिखाई दे रही थी | यह रंग लाल, नारंगी, पीला, हरा, आसमानी, नीला और बैंगनी थे इनका क्रम भी यही था | इसके बाद न्यूटन ने इसका प्रयोग प्रयोगशाला में किया वहां पर भी यह इसी क्रम था |  न्यूटन ने इस प्रकाश की पट्टी को “स्पेक्ट्रम” के नाम से सम्बोधित किया | इससे उन्होंने यह सिद्ध किया कि सूर्य का श्वेत प्रकाश वास्तव में सात रंगों का एक मिश्रण है |

कुछ समय के बाद वैज्ञानिक परीक्षणों के द्वारा देखा गया कि सौर स्पेक्ट्रम के बैंगनी रंग से नीचे भी कुछ रश्मियाँ पाई जाती हैं जो आँख से नहीं दिखाई पड़ती हैं, परंतु फोटोप्लेट पर प्रभाव डालती हैं और उनका फोटो लिया जा सकता है | इन किरणों को पराबैंगनी किरणें (Ultraviolet rays) कहा जाता है | इसी प्रकार से लाल रंग से ऊपर भी कुछ अवरक्त किरणें पाई जाती हैं, जो कि सभी वर्ण की रश्मियाँ विद्युत चुंबकीय तरंगें होती हैं | इस प्रकार से जानकारी मिली की रंगीन प्रकाश, अवरक्त, पराबैंगनी प्रकाश, एक्स-किरण, गामा-किरण, माइक्रो तरंगें तथा रेडियो तरंगें यह सभी एक प्रकार की विद्युत चुम्बकीय तरंगे है | इस प्रकार से विद्युत चुम्बकीय तरंगों का मापन तरंगदैर्घ्य के आधार पर किया जाता है |

तरंगदैर्घ्य क्या है (What Is Wavelength)?

भौतिक विज्ञान में कोई साइन-आकार की तरंग, जितनी दूरी के बाद अपने आप को पुनरावृत करती है, उस दूरी को उस तरंग का तरंगदैर्घ्य कहा जाता है | इसको इस प्रकार से भी कहा जा सकता है, कोई तरंग के समान कला वाले दो क्रमागत बिन्दुओं की दूरी को तरंगदैर्घ्य कहा जाता है | तरंगदैर्घ्य को ग्रीक अक्षर ‘लैम्ब्डा’ (λ) द्वारा निरुपित किया जाता है, इसका SI मात्रक मीटर है, इसका सूत्र इस प्रकार है-

तरंगदैर्घ्य (λ) = तरंग के वेग (v) / आवृति (f) है |

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स्पेक्ट्रम में तरंग का ट्रांसफर कैसे करते है ?

सूचना के प्रसारण में उपकरणों की आवश्यकता होती है-

  • ट्रांसमिशन लाइन
  • ट्रासंमिशन एंटीना
  • रिसीवर एंटीना

किसी भी देश की सरकार के द्वारा इस प्रकार के उपकरण स्थान- स्थान पर लगाए जाते है | इन उपकरणों को सरकार प्राइवेट कंपनियों को कुछ समय के लिए प्रयोग करने की अनुमति देती है, जिसके बदले सरकार को आय प्राप्त होती है | सरकार इसके लिए नीलामी करवाती है, जिससे अधिक से अधिक आय अर्जित की जा सके |

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बैंड्स (Bands)

तरंगों को सही दिशा के लिए उसे बैंड्स में विभाजित किया गया है, जो की तरंगों की दिशा का निर्धारण करता है | बैंड्स का निर्माण इस लिए भी किया गया है, जिससे एक तरंग में दूसरी तरंग का हस्तक्षेप न हो |

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सर्किल (Circle)

प्रत्येक देश अपने भगौलिक स्थिति के अनुसार क्षेत्र को सर्किल में विभाजित करता है, जिससे इस पर नियंत्रण रखा जा सके | भारत 23 टेलीकॉम परिमंडलों में विभाजित है |

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स्पेक्ट्रम नीलामी कैसे होती है (How Is Spectrum Auction)?

केंद्र सरकार स्पेक्ट्रम नीलामी करने के लिए सबसे पहले एक न्यूनतम मूल्य का निर्धारण करती है, इसी मूल्य के आधार पर अधिसूचना जारी की जाती है | इस अधिसूचना में टेलिकॉम कंपनियों को आमंत्रित किया जाता है | एक नियत तिथि को स्पेक्ट्रम की बोली लगायी जाती है | जो कम्पनी अधिक मूल्य देने पर अपनी सहमति देती है, उस कंपनी को उस क्षेत्र के स्पेक्ट्रम एक निर्धारित समय के लिए प्रदान कर दिए जाते है | इसके माध्यम से वह कम्पनी उस क्षेत्र में टेलिकॉम सेवाएं प्रदान करती है | इन सेवाओं के बदले कंपनियों को ग्राहकों से लाभ होता है | सरकार इस नीलामी के द्वारा प्राप्त हुई धनराशि से अपनी आय बढ़ाती है |

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यहाँ हमने स्पेक्ट्रम (Spectrum) और टेलीकॉम (DoT) स्पेक्ट्रम नीलामी के विषय में जानकारी प्रदान की है। इस जानकारी से संबंधित कोई प्रश्न या अन्य जानकारी के लिए कमेंट बॉक्स का उपयोग करें। हम आपके उत्तर का इंतजार कर रहे हैं।

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Munendra Singh
Munendra Singh
Member of Team (Hindi Content)