ग्राम प्रधान कैसे बने, चुनाव कैसे होता है

ग्राम प्रधान कैसे बने

भारत में 70 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण परिवेश में निवास करती है, इतनी बड़ी संख्या को स्वयं का प्रशासन स्थापित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 243 में व्यवस्था प्रदान की गयी है | इसके अंतर्गत पंचायती राज का प्रावधान किया गया है |  इसमें ग्राम सभा और ग्राम पंचायत का गठन किया जाता है, जो सम्पूर्ण ग्राम के विकास के लिए जिम्मेदार होती है | ग्राम पंचायत का प्रमुख ग्राम प्रधान होता है, इस पेज पर ग्राम प्रधान बनने तथा उसके चुनाव, योग्यता, कार्य और अधिकार के विषय में विस्तार से बताया जा रहा है |

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ग्राम सभा

किसी गांव के कुल व्यक्तियों की संख्या जिनका नाम वोटर लिस्ट में सम्मिलित हो | इन व्यक्तियों के समूह को ग्राम सभा कहा जाता है | एक ग्राम सभा में 200 या इससे अधिक व्यक्तियों का होना आवश्यक है |

ग्राम प्रधान

एक ग्राम सभा में एक अध्यक्ष का निर्वाचन किया जाता है, जिसे ग्राम प्रधान, सरपंच अथवा मुखिया के नाम से जाना जाता है |

वेतन

उत्तर प्रदेश राज्य में ग्राम प्रधान का वेतन 3500 रूपये है, इसके अतिरिक्त उन्हें यात्रा भत्ता एवं अन्य खर्चों के रूप में 15000 रूपये प्रति माह प्राप्त होते है |

ग्राम पंचायत का गठन व चुनाव

ग्राम सभा के कुल सदस्यों के द्वारा एक अध्यक्ष या प्रधान और अन्य सदस्यों को निर्वाचित किया जाता है, इन अध्यक्ष या प्रधान और अन्य सदस्यों को ग्राम पंचायत कहते है, इसका कार्यकाल 5 वर्ष होता है |

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चुनाव कैसे होता है ?

गावं में प्रत्येक पांच वर्ष के बाद ग्राम प्रधान का चुनाव कराया जाता है, राज्य सरकार के द्वारा इसके लिए निर्वाचन आयोग को स्वीकृति प्रदान की जाती है, इसके बाद निर्वाचन आयोग के द्वारा अधिसूचना जारी की जाती है, अधिसूचना जारी होते ही आचार संहिता को लागू कर दिया जाता है | अब जो व्यक्ति ग्राम प्रधान या सदस्य के पद पर चुनाव लड़ना चाहता है, उसको एक निर्धारित समय अवधि के अंदर पर्चा दाखिल या आवेदन पत्र को जिले के निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होता है | इसके बाद निर्वाचन कार्यालय के द्वारा प्रत्येक आवेदन कर्ता को एक चुनाव चिन्ह प्रदान किया जाता है |

अब सभी प्रत्याशी के द्वारा चुनाव प्रचार किया जाता है, यह चुनाव प्रचार निर्वाचन आयोग के  निर्देशानुसार किया जाता है | इसके बाद निर्धारित तिथि को मतदान कराया जाता है, मतदान के पश्चात मतगणना की जाती है, जिस प्रत्याशी को अधिक मत प्राप्त होते है, उसे ग्राम प्रधान पद पर निर्वाचित किया जाता है | निर्वाचित सदस्य को निर्वाचन अधिकारी के द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है |

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ग्राम पंचायत को शपथ

चुनाव जीतने के बाद ग्राम प्रधान और सभी सदस्यों को पीठासीन अधिकारी या ग्राम पंचायत सचिव के द्वारा शपथ ग्रहण कराई जाती है |

ग्राम प्रधान के कार्य

  • ग्राम पंचायत को विलेज कॉउंसलिंग के नाम से जाना जाता है, प्रत्येक गांव में (जहाँ एक हजार से अधिक जनसँख्या) एक ग्राम पंचायत का गठन किया जाता है, इसका अध्यक्ष ग्राम प्रधान होता है | इसका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है |
  • गांव के विकास के लिए ग्राम पंचायत के द्वारा कई प्रकार के कार्यों का निष्पादन किया जाता है | इन कार्यों को करने में ग्राम प्रधान की मुख्य भूमिका होती है |
  • ग्राम पंचायत कृषि कार्य की रूप रेखा तैयार करती है और कृषि संबंधी व्यवधानों को अपने स्तर पर सही करने का प्रयास करती है |
  • गावं का चतुर्मुखी विकास करना एक ग्राम प्रधान की मुख्य जिम्मेदारी होती है | इसके लिए ग्राम प्रधान गावं के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण करता है और उसमे आवश्यक चीजों की पूर्ति के लिए उच्च अधिकारियों से वार्तालाप करता है |
  • युवा कल्याण संबंधी कार्यों को कराना ग्राम प्रधान का एक प्रमुख कार्य है |
  • ग्राम प्रधान के द्वारा राजकीय नलकूपों की मरम्मत व रख रखाव किया जाता है |
  • ग्रामीण स्तर पर चिकित्सा और स्वास्थ्य संबंधी कार्य ग्राम प्रधान की सहमति के द्वारा कराया जाता है |
  • ग्राम पंचायत महिला एवं बाल विकास संबंधी कार्य को करती है |
  • पशु धन विकास संबंधी कार्य ग्राम प्रधान के द्वारा कराये जाते है |
  • समस्त प्रकार की पेंशन को स्वीकृत करने व वितरण करने का कार्य ग्राम पंचायत के माध्यम से ग्राम प्रधान करता है |
  • राशन की दुकान का आवंटन और निरस्तीकरण ग्राम पंचायत के द्वारा किया जाता है |
  • पंचायती राज्य संबंधी ग्राम स्तरीय कार्य ग्राम प्रधान के द्वारा कराया जाता है |
  • ग्राम पंचायत में जितनी भी कच्ची-पक्की सड़कों का निर्माण होता है, सभी ग्राम प्रधान को ही देखने होते हैं, साथ ही पानी निकासी के ड्रेनेज की भी व्यवस्था भी करनी होती है |
  • ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी होती है कि ग्रामीणों के पशुओं के पीने के पानी की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी होती है

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ग्राम प्रधान के अधिकार

  • उत्तर प्रदेश में पंचायती राज एक्ट के अनुसार विकास की कार्य योजना तैयार करने के लिए हर ग्राम पंचायत में 6 समितियां गठित की जाती है, इन समिति में प्रशासनिक कार्य समिति, नियोजन कार्य समिति, निर्माण कार्य समिति, जल प्रबंधन समिति, चिकित्सा स्वास्थ्य समिति, शिक्षा समिति है | परन्तु वास्तविक रूप इन सभी का कार्य ग्राम प्रधान के द्वारा कराया जाता है |
  • एक ग्राम प्रधान के रूप में वह ग्रामसभा एवं ग्राम पंचायत की बैठक बुलाता है तथा इसकी कार्यवाही को नियंत्रित करता है |
  • ग्राम पंचायतों के लिए सरकार द्वारा निर्धारित विकास योजनाओं, निर्माण कार्य व अन्य कार्यक्रमों की जानकारी रखना तथा सम्बंधित अधिकारियों से आवश्यक जानकारी लेकर ग्रामवासियों को बताना जिनसे वह इसका लाभ प्राप्त कर सके |

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यहाँ पर हमनें आपको ग्राम प्रधान के विषय में जानकारी उपलब्ध करायी है, यदि इस जानकारी से सम्बन्धित आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्न आ रहा है, अथवा इससे सम्बंधित अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो कमेंट बाक्स के माध्यम से पूँछ सकते है,  हम आपके द्वारा की गयी प्रतिक्रिया और सुझावों का इंतजार कर रहे है |

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