PM2.5 और PM10 क्या है

PM2.5 और PM10  

देश में लगातार वाहनों की बढ़ती संख्या और पेड़ों की तेजी से कटान के कारण प्रदूषण के प्रकार और उसकी गति में प्रत्येक वर्ष बढ़ोत्तरी हो रही है | देश की राजधानी दिल्ली जैसे शहरों में वायु प्रदूषण अपनी चरम सीमा पर यानि कि खतरनाक स्थिति तक अक्टूबर और नवंबर महीने में दिखाई देता है | इसका कारण वायु में मौजूद PM 2.5 और PM 10 कण होते है, इन्हें इंग्लिश में पार्टिकुलेट मैटर (Particulate Matter) कहते है| ये कण लोगों के स्वास्थ्य के लिए बहुत अधिक हानिकारक होते है | जब वायु में इन कणों का स्तर बढ़ जाता है तब सांस लेने में समस्या, आँखों में जलन आदि कई प्रकार की समस्याएं होती हैं | आइये आपको बताते हैं कि PM 2.5 and PM 10 क्या होते हैं और कैसे लोगों के स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसान दायक होते हैं |

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क्या हैं पीएम 2.5 और पीएम 10 (What is PM10 and PM 2.5 Definition)

आपको जानकारी देने के लिए दिल्ली शहर से शुरुआत करते है जहाँ की हवा देश के सबसे ज्यादा दूषित शहरों में से टॉप पर है | दिल्ली की जहरीली हवा होने का कारण, वायु में पार्टिकुलेट मैटर (PM) के स्तर का बढ़ जाना है |  दिल्ली की हवा में PM2.5 और PM10 के स्तर में निरंतर वृद्धि से वहां की हवा तेजी से प्रदूषित हो रही है | वायु में PM2.5 की मात्रा 60 और PM10 की मात्रा 100 होने की स्थिति सांस लेने के लिए सुरक्षित मानते है। यदि हम वर्तमान समय में दिल्ली की वायु में इसकी मौजूदगी की बात करें तो इसका स्तर बहुत अधिक हो चुका है |  दिल्ली की हवा में PM10 का उच्चतम स्तर अक्टूबर और नवंबर महीने में लगभग 600 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक मिलता है। इसके इतना अधिक होने के कारण ही दिल्ली में चारो ओर जहरीली धुंध ही दिखाई देती है। जो की यहाँ के लोगों की सेहत बिगाड़ने का एक बड़ा कारण बन जाती है।

अगर हम पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार माने तो पीएम 10 को रेस्पायरेबल पर्टिकुलेट मैटर कहते हैं | पीएम 10 कणों का आकार 10 माइक्रोमीटर तक होता है | इससे छोटे कणों का व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे भी कम होता है | इसमें धूल, गर्द और धातु के सूक्ष्म कण मिले होते हैं | पीएम 10 और 2.5 धूल, कंस्‍ट्रक्‍शन और कूड़ा व पुआल जलाने से और अधिक तेजी के साथ बढ़ता है।

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वायु प्रदूषित होने का कारण (Reason for Pollution)

पर्टिकुलेट मैटर कई आकारों में पाए जाते हैं और यह मानव और प्राकृतिक दोनों स्रोतों के कारणों से हो सकते है, परन्तु मानव इसका प्रमुख कारण है| इन स्रोतों को दो प्रकार से देखा जा सकता है प्राइमरी स्रोत और सेकेंडरी स्रोत |  प्राइमरी स्रोत के अंतर्गत ऑटोमोबाइल उत्सर्जन, धूल और खाना पकाने के रखेंगे | प्रदूषण के सेकेंडरी स्रोत के अंतर्गत सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे रसायनों की जटिल प्रतिक्रिया से भी हो सकता है | यही कण वायु में विलीन हो जाते हैं और इसको प्रदूषित कर देते हैं | इसके अतरिक्त जंगल में आग लगने से, लकड़ी के जलने से, एग्रीकल्चर बर्निंग, उद्योग कंपनियों का धुआं, निर्माण कार्यों से उत्पन्न होने वाली धूल वायु में मिल जाती है इस तरह के स्रोतों से प्रदूषण बढ़ जाता है |

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PM2.5 और PM10 सेहत पर कैसे पहुंचाता है नुकसान (Health Effects of PM10 and PM2.5)

  • सांस लेने में दिक्कत
  • आंखें, नाक और गले में जलन होती है |
  • छाती में खिंचाव महसूस होता है |
  • फेफड़े सही से काम नहीं कर पाते है |
  • गंभीर श्वसन रोग होने का खतरा बढ़ जाता है |
  • अनियमित दिल की धड़कन का खतरा होता है |
  • समय से पहले मृत्यु |

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कैसे करें बचाव (How Can You Protect Yourself)

  • लोगों को ऐसे समय में मास्क का प्रयोग निरंतर करना चाहिए और समस्या अधिक दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए |
  • प्रदूषण स्तर अधिक हो जाने पर बाहर व्यायाम नहीं करना चाहिए |
  • लकड़ी या थ्रैश को जलाने से बचना चाहिए क्योंकि ये कण प्रदूषण का मुख्य स्रोत हैं |
  • घर में या बाहर दोनों जगहों पर धूम्रपान नहीं करना चाहिए |
  • वायु प्रदूषण से अपने घर को सुरक्षित करने के लिए, आप वायु शोधक का भी प्रयोग कर सकते हैं | वायु शोधक (air purifier) आपके घर के अंदर वायु प्रदूषण की दर को कम करने में सहायक होगा |
  • यदि आपके शहर में वायु प्रदूषण कई दिनों तक मौजूद रहता है, तो एक अप्रभावित स्थान पर जाने पर विचार कर सकते है, जिसमे नवजात शिशु और बुजुर्गों के लिए जरूरी होगा |

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प्रदूषण के खिलाफ कदम (Steps to Reduce Air Pollution)

दिल्ली समेत कई राज्यों में प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कृषकों को पराली ना जलाने के आदेश दिए, और साथ दीपावली में क्रैकर्स पर भी रोक लगाई गई | इसी के साथ राज्य की कई सरकारों ने भी प्रदूषण के रोकथाम हेतु अलग – अलग कानून लागू किये |

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यहाँ पर हमनें PM2.5 और PM10 के विषय में जानकारी उपलब्ध करायी है, यदि इस जानकारी से सम्बन्धित आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्न आ रहा है, अथवा इससे सम्बंधित अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो कमेंट बाक्स के माध्यम से पूँछ सकते है,  हम आपके द्वारा की गयी प्रतिक्रिया और सुझावों का इंतजार कर रहे है |

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