सुप्रीम कोर्ट के जज की चयन प्रक्रिया क्या है?

सुप्रीम कोर्ट के जज की चयन प्रक्रिया के बारे में जानकारी (INFORMATION ABOUT SELECTION PROCESS OF THE SUPREME COURT JUDGE)

भारत के सर्वोच्च न्यायालय को संविधान की रक्षा करने की जिम्मेदारी दी गयी है, कोई भी सरकार संविधान के मूल ढाचें में परिवर्तन नहीं कर सकती है | सर्वोच्च न्यायालय ही केंद्र सरकार और राज्य सरकार के आपसी मुद्दों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करती है | भारत के सबसे संवेदनशील मुद्दे सुप्रीम कोर्ट के द्वारा ही सुलझाए जाते है | यह सभी कार्य वहां के जज के द्वारा किये जाते है | इतने महत्वपूर्ण पद के लिए जज का चयन करना भी आसान नहीं है | इसलिए इस पेज पर सुप्रीम कोर्ट के जज की चयन प्रक्रिया और भारत सरकार द्वारा दी गयी स्वीकृति के विषय में बताया जा रहा है |

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सुप्रीम कोर्ट के जज की चयन प्रक्रिया क्या है (WHAT IS THE SELECTION PROCESS OF SUPREME COURT JUDGE) ?

सुप्रीम कोर्ट के जज का चयन कॉलेजियम प्रणाली के द्वारा किया जाता है | इस प्रणाली में जजों की एक पीठ होती है | कोलिजियम सिस्टम का उद्धभव 1993 में सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ, एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड मामले के बाद हुआ था | इस मामले में कहा गया कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश की राय नज़रअंदाज़ नहीं की जा सकता है | कोलिजियम सिस्टम स्वयं सुप्रीम कोर्ट के उन तीन अहम फैसलों के बाद आया था जिन्हे ‘थ्री जजेज़ केस’ भी कहा जाता है |

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कोलिजियम सिस्टम में क्या होता है (WHAT HAPPENS IN THE COLISEUM SYSTEM) ?

कॉलेजियम में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सहित सर्वोच्च न्यायालय के पांच जज होते हैं, तीन जजों द्वारा पारित किये गए निर्णय को सही माना जाता है | निर्णय में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका का प्रभाव होता है, लेकिन उसके लिए भी उसे दो जजों की राय लेनी ज़रूरी है | यह कालेजियम सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की नियुक्तियां और तबादलों का अधिकार रखता है, लेकिन इसका संविधान में कही भी उल्लेख नहीं किया गया है |

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भारत सरकार की स्वीकृति क्यों आवश्यक है (WHY IS THE ACCEPTANCE OF THE GOVERNMENT OF INDIA) ?

कोलिजियम सिस्टम सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए अपनी अनुशंसा भारत सरकार के पास भेजती है | भारत सरकार में प्रधानमंत्री उस सिफारिश को स्वीकृति प्रदान करने के बाद राष्ट्रपति के पास भेजते है | राष्ट्रपति से स्वीकृति मिलने के बाद ही नियुक्ति प्रदान की जाती है | भारत सरकार की स्वीकृति के बिना न्यायाधीशों की नियुक्ति नहीं हो सकती है |

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