लोकसभा अध्यक्ष कैसे चुना जाता है?

लोकसभा अध्यक्ष के बारे में जानकारी (Information About Lok Sabha Speaker)

भारत की संसद का निर्माण लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति से मिलकर होता है | लोकसभा को निम्न सदन या जनता के प्रतिनिधियों का सदन कहा जाता है | इसका कार्यकाल पांच वर्ष होता है | सरकार के गठन होने के बाद लोकसभा को सुचारु ढंग से संचालित करने के लिए संविधान में लोकसभा अध्यक्ष के पद का प्रावधान किया गया है | इसके लिए चुने गए लोकसभा सदस्यों में से किसी एक प्रतिनिधि को इस पद के लिए चुना जाता है | इस पेज पर लोकसभा अध्यक्ष कैसे चुना जाता है, उसके कार्य और अधिकार के विषय में बताया जा रहा है |

ये भी पढ़ें: लोकसभा का चुनाव कैसे होता है

प्रोटेम स्पीकर (कार्यवाहक अध्यक्ष) (Protem Speaker) क्या है ?

जब किसी नयी लोकसभा का गठन किया जाता है, उस समय राष्ट्रपति के द्वारा प्रोटेम स्पीकर (कार्यवाहक अध्यक्ष) की नियुक्ति की जाती है | राष्ट्रपति प्रोटेम स्पीकर के रूप में केवल उस व्यक्ति को ही चुनते है, जिसे लोकसभा के सदस्य होने का सबसे अधिक अनुभव होता है | प्रोटेम स्पीकर को राष्ट्रपति के द्वारा शपथ ग्रहण कराई जाती है |

ये भी पढ़ें: शासन (Governance) और प्रशासन (Administration) में क्या अंतर है?

 प्रोटेम स्पीकर के कार्य (Proteom Speaker’s Work)

प्रोटेम स्पीकर के कार्य इस प्रकार है-

  • निर्वाचित संसद सदस्यों को शपथ प्रोटेम स्पीकर के द्वारा दिलवाई जाती है |
  • नये लोकसभा अध्यक्ष के चुनने की प्रक्रिया की अध्यक्षता प्रोटेम स्पीकर के द्वारा की जाती है |

ये भी पढ़ें: अध्यादेश क्या होता है, अध्यादेश और विधेयक में अंतर

 लोकसभा अध्यक्ष कैसे चुना जाता है (How is Lok Sabha Speaker elected)?

भारतीय लोकतंत्र में लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव निर्वाचित सदस्यों के साधारण बहुमत के द्वारा किया जाता है | लोकसभा अध्यक्ष के नाम का चयन बहुमत प्राप्त दल के द्वारा ही किया जाता है, लेकिन पिछले कुछ लोकसभा के गठन में भारतीय लोकतंत्र की एक स्वस्थ व्यवस्था का चलन शुरू किया गया है | इस व्यवस्था में संसद के सभी दलों से अनौपचारिक रूप से समर्थन प्राप्त किया जाता है | जिस नाम पर सभी की सहमति बनती है उसका नाम प्रस्तावित किया जाता है | यदि एक से अधिक नाम का प्रस्ताव आता है, तो प्रोटेम स्पीकर विधिवत अनुमोदित होने के क्रम के अनुसार नामों को रखता जाता है | इसके बाद साधारण बहुमत के द्वारा निर्णय लिया जाता है और परिणाम की घोषणा प्रोटेम स्पीकर के द्वारा की जाती है |

परिणाम में जिस भी सदस्य को लोकसभा अध्यक्ष घोषित किया जाता है, उस नवनिर्वाचित अध्यक्ष को प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता द्वारा अध्यक्ष आसन तक ले जाया जाता है | इसके बाद सदन के सभी राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा अध्यक्ष को बधाई दी जाती है | इसके बाद नवनिर्वाचित अध्यक्ष के द्वारा धन्यवाद भाषण दिया जाता है, तत्पश्चात नये अध्यक्ष अपना कार्यभार ग्रहण करते है |

ये भी पढ़ें: राज्य में राष्ट्रपति शासन कैसे लगता है ?

लोकसभा अध्यक्ष के कार्य और अधिकार (Functions And Rights Of The Lok Sabha Speaker)

लोकसभा अध्यक्ष सदन के सत्रों की अध्यक्षता करता है और सदन में सभी कार्यों का सुचारु ढंग से संचालित करता है | वह किसी भी विधेयक को धन विधेयक की मान्यता देता है | वह लोकसभा में अनुशासन और मर्यादा को लागू करता है, यदि कोई सदस्य इसके विपरीत कार्य करता है, तो उसके प्रति कार्यवाही करता है | वह प्रस्ताव, संकल्पों, अविश्वास प्रस्ताव, स्थगन प्रस्ताव, सेंसर मोशन को पेश करने की अनुमति देता है, वह सभी सदस्यों के लिए अटेंशन की नोटिस जारी करता है | सदन की बैठक का एजेंडा लोकसभा अध्यक्ष ही तय करता है |

ये भी पढ़ें: लोकसभा में कितनी सीटें हैं ?

यहाँ पर हमनें आपको लोकसभा अध्यक्ष कैसे चुना जाता है, उसके कार्य और अधिकार के विषय में जानकारी उपलब्ध करायी है, यदि इस जानकारी से सम्बन्धित आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्न आ रहा है, अथवा इससे सम्बंधित अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो कमेंट बाक्स के माध्यम से पूँछ सकते है,  हम आपके द्वारा की गयी प्रतिक्रिया और सुझावों का इंतजार कर रहे है |

ये भी पढ़ें: विपक्ष का नेता (Opposition Leader) कौन होता है?

ये भी पढ़ें: बजट क्या है (Budget Kya Hai)

ये भी पढ़ें: निर्दलीय उम्मीदवार (Non-Party Candidate) क्या होता है?

ये भी पढ़ें: कैबिनेट मंत्री और राज्यमंत्री में क्या अंतर है