कैबिनेट मंत्री और राज्यमंत्री में क्या अंतर है

कैबिनेट मंत्री और राज्यमंत्री में अंतर 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 74 व 75 में मंत्रिपरिषद का प्रावधान किया गया है जो देश के लिए नीति और कानून का निर्धारण करती है, मंत्री परिषद् के अंतर्गत चार प्रकार के मंत्री बनाये जाते है, जो सरकार का पूर्ण ढांचा तैयार करते है | यह सरकार ही देश के आंतरिक और विदेशी मामलों के प्रति उत्तरदायित्व निभाती है | प्रत्येक मंत्री को एक विभाग प्रदान कर दिया जाता है, जो अपने विभाग से सम्बंधित प्रश्नों का उत्तर देने के लिए बांध्य होता है और यह अपने विभाग का प्रमुख होता है, इस पेज पर कैबिनेट मंत्री और राज्यमंत्री में अंतर के बारे में बताया जा रहा है |

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मंत्रिपरिषद क्या है ?

चुनाव के बाद जब सरकार का गठन किया जाता है, तो सरकार चलाने के लिए कुछ लोगों की आवश्यकता होती है, जो सभी प्रकार के निर्णय लेते है, इन सभी व्यक्तियों के समूह को मंत्रिपरिषद कहा जाता है |

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मंत्रिपरिषद में मंत्री के प्रकार

मंत्रिपरिषद में चार प्रकार के मंत्री होते है, जो अपने-अपने पद के अनुसार विभाग के कार्य का निष्पादन करते है, यह इस प्रकार है-

  • कैबिनेट मंत्री
  • राज्य मंत्री
  • स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री
  • उप मंत्री

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कैबिनेट मंत्री

प्रधान मंत्री सबसे योग्य मंत्रियों को कैबिनेट मंत्री के रूप में चुनता है, कैबिनेट सरकार के सभी निर्णयों के लिए बैठक करती है, इस बैठक में लिए गए निर्णय ही सरकार को दिशा- निर्देश प्रदान करते है |

कैबिनेट मंत्री को अन्य मंत्रियों की तुलना में अधिक शक्ति और सुविधा प्रदान की जाती है | कैबिनेट की प्रत्येक बैठक में सभी कैबिनेट मंत्री का पहुंचना अनिवार्य रहता है |

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राज्य मंत्री

कैबिनेट मंत्री के सहयोग के लिए राज्य मंत्री पद का निर्माण किया गया है, इस पद पर व्यक्ति कैबिनेट मंत्री के निर्देशानुसार कार्य करता है, राज्य मंत्री कैबिनेट मंत्री की बैठक में भाग नहीं ले सकता है | विशेष परिस्थति में वह कैबिनेट में भाग ले सकता है |

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स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री

इस पद पर व्यक्ति अपने विभाग का प्रमुख होता है, यह कैबिनेट मंत्री के अधीन नहीं होता है, यह अपने विभाग की रिपोर्ट प्रधानमंत्री को देता है, प्रधानमंत्री इसके लिए किसी विशेष मंत्री को भी नियुक्त कर सकते है | जब कैबिनेट की बैठक में स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री के विभाग से सम्बंधित चर्चा करनी होती है, उस समय स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री को बैठक में उपस्थित रहना अनिवार्य रहता है |

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उप मंत्री

किसी मंत्री के सहयोग के लिए उप मंत्री पद का निर्माण किया गया है, यह अपने वरिष्ठ मंत्री का कार्यभार देखता है तथा उनकी अनुपस्थिति में वह सम्पूर्ण विभाग के प्रमुख के रूप में कार्य करता है |

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