संविधान संशोधन विधेयक क्या है Amendment in Constitution

संविधान संशोधन विधेयक क्या है 

किसी भी देश में प्रशासन सुचारु रूप से चलाने के लिए कुछ नियम बनाये जाते है, नियम बनाते समय सभी वर्गों का विशेष ध्यान रखा जाता है, इन सभी नियम को एक पुस्तक में संकलित किया जाता है, फिर इस नियम की पुस्तक को राष्ट्र को समर्पित कर दिया जाता है, जिसे संविधान कहा जाता है, परन्तु समय के अनुसार इसमें परिवर्तन की आवश्यकता होती है, जिससे संविधान में गुणवत्ता बढ़ती जाती है | इस परिवर्तन को ही संविधान संशोधन कहा जाता है | प्रत्येक राष्ट्र में संविधान संशोधन करने की अपनी प्रक्रिया होती है, इसका उल्लेख संविधान बनाते समय ही कर दिया जाता है, भारत में यह प्रक्रिया अनुच्छेद-368 के अंतर्गत की गयी है |

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संविधान क्या है ?

देश के प्रशासन को चलाने के लिए बनाये गए नियम और कानून को संविधान कहा जाता है, इसका उल्लंघन देश का कोई भी नागरिक नहीं कर सकता है |

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संविधान संशोधन क्या है ?

देश के शासन के लिए बनाये गए नियम में किसी भी प्रकार के परिवर्तन को संविधान संशोधन कहा जाता है, संविधान संशोधन करने की एक प्रक्रिया बनायीं गई है, जिसके अनुरूप संविधान संशोधन किया जा सकता है |

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संविधान संशोधन विधेयक क्या है ?

जब किसी प्रतिनिधि या दल को यह महसूस होता है, कि संविधान के इस नियम को परवर्तित करना आवश्यक है, जिससे सभी लोगों को अधिक लाभ प्राप्त हो सकता है, इस परिवर्तन या संशोधन के लिए बनाये गए संविधान संशोधन बिल के प्रारूप को विधेयक कहा जाता है, इसमें उससे सम्बंधित सभी शर्तों को विस्तार पूर्वक दर्शाया जाता है | लिखते समय यदि किसी शब्द में संशय प्रतीत होता है, तो उस शब्द के अर्थ का विस्तार पूर्वक वर्णन किया जाता है, इसे ही विधेयक कहा जाता है |

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संविधान संशोधन कैसे किया जाता है ?

भारत में संविधान संशोधन भाग- 20 अनुच्छेद-368 के अधीन किया जाता है | इस अनुच्छेद में तीन प्रक्रिया के विषय में बताया गया है, जिससे संविधान संशोधन किया जाता है, यह प्रक्रिया इस प्रकार है |

  • संसद के साधारण बहुमत (simple majority) से
  • संसद के दो-तिहाई बहुमत से
  • राज्य के विधानमंडल की स्वीकृति से

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संविधान संशोधन करने के लिए किसी दल या जन प्रतिनिधि के द्वारा लोकसभा या राज्य सभा में विधेयक पेश किया जाता है, विधेयक पेश करने के बाद इस पर चर्चा की जाती है, चर्चा पूरी होने के बाद उस सदन में वोटिंग कराई जाती है, यदि उस विधेयक के पक्ष में निर्धारित मत पड़ते है, तो उसे पारित मान लिया जाता है |

इसके बाद उस विधयेक को दूसरे सदन में भेजा जाता है, वहां पर भी इस विधेयक पर चर्चा की जाती है, चर्चा पूरी होने पर मतदान काराया जाता है, यदि विधेयक के पक्ष में निर्धारित मत पड़ते है, तो इसे पारित मान लिया जाता है, इसके बाद इस विधेयक को राष्ट्रपति के पास स्वीकृति प्रदान करने के लिए भेजा जाता है, जब राष्ट्रपति इस विधेयक पर हस्ताक्षर कर देते है, तो इसे सम्पूर्ण देश में लागू कर दिया जाता है |

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