बहुमत क्या होता है, विशेष और साधारण बहुमत में अंतर

बहुमत क्या होता है 

बहुमत (plurality or majority) शब्द का प्रयोग मतदान अर्थात वोंटिंग के सन्दर्भ में किया जाता है । सामान्यतः जो प्रत्याशी सर्वाधिक मत प्राप्त करता है उसे ‘बहुमत मिला है‘ कहते हैं । किसी संसदीय व्यवस्था मे संसद या विधानसभा में सबसे अधिक  सदस्यों वाले दल के द्वारा पूर्ण बहुमत से बनाई गई सरकार को बहुमत की सरकार कहते हैं । बहुमत क्या होता है, इससे सम्बंधित जानकारी आपको इस पेज पर दे रहे है |

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बहुमत (Majority)

बहुमत सामान्यतः चार प्रकार का होता है

  • सामान्य या साधारण बहुमत (Simple Majority)
  • पूर्ण बहुमत (Absolute Majority)
  • प्रभावी बहुमत (Effective majority)
  • विशेष बहुमत (Special Majority)

1.सामान्य या साधारण बहुमत (Simple Majority)

साधारण बहुमत सदन में उपस्थित सदस्यों का 50% से अधिक होता है, उदहारण के रूप में किसी समय निम्न सदन अर्थात लोकसभा में 543 सदस्य पूरे उपस्थिति नहीं है, तो उस समय उपस्थिति सदस्यों के 50% से अधिक को ही बहुमत मान लिया जाता है, और इसे साधारण बहुमत कहा जाता है | इसी प्रकार यह राज्यसभा में भी लागू होता है, राज्यसभा में भी उपस्थित सदस्यों के 50% से अधिक को साधारण बहुमत कहा जाता है

साधारण बहुमत को निकालने का फार्मूला इस प्रकार है-

उपस्थित सदस्यों की संख्या / 2 + 1

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2.पूर्ण बहुमत (Absolute Majority)

पूर्ण बहुमत का अर्थ है, विधान मंडल/संसद/सदन/सभा के कुल व उपस्थित सदस्य संख्या के दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से कोई विधेयक पारित होना /निर्णय लेना । इसकी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि किसी भी सदन का जो पूर्ण बहुमत होता है, वह निश्चित होता है अर्थात उसमें किसी प्रकार का कोई संशोधन नहीं होता है |

बहुमत को निकालने का फार्मूला इस प्रकार है-

सदन की कुल सदस्य संख्या / 2 +1

= 50%+1

= यहाँ जो 50% दिया है, वह उपस्थिति और मतदान करनें वालो की संख्या नही है, यह संख्या सदन की कुल सदस्य संख्या का आधा है |

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3.प्रभावी बहुमत

जब लोक सभा अध्यक्ष उपाध्यक्ष या राज्यसभा के उपसभापति को पद से हटाना हो या जब राज्यसभा उपराष्ट्रपति को पद से हटाने प्रभावी बहुमत का प्रयोग किया जाता है | मतदान के समय उपस्थित सदन के 50% से अधिक सदस्य उपस्थित हो (खाली सीटॉ को छोडकर) उस समय इसका प्रयोग किया जाता है |

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4.विशेष बहुमत (Special Majority)

विशेष बहुमत को स्पेशल मेजोरिटी कहा जाता है, इसका उपयोग सदन में मुख्य रूप से दो कारणों के लिए किया जाता है | पहला  जब संविधान में संशोधन करना हो तथा दूसरा तब जब महाभियोग लाना हो | विशेष बहुमत (पूर्ण बहुमत और साधारण बहुमत) से भिन्न होता है, और इसमें सदन के कुल सदस्यों का दो तिहाई (2/3) गिना जाता है, अर्थात किसी भी सदन में कुल सदस्यों की संख्या के दो तिहाई को विशेष बहुमत कहा जाता है | इसे निकालने का फार्मूला इस प्रकार है-

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पहले कुल सदस्यों को 3 से भाग दीजिए

लोकसभा कुल सदस्य: 543

543/3 = 181

अब 181 को 2 से गुणा कर दीजिए

181 X 2 = 362

लोकसभा विशेष बहुमत 362 है

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विशेष और साधारण बहुमत में अंतर

विशेष बहुमत के अंतर्गत संविधान में संशोधन करना तथा महाभियोग लगानें हेतु किया जाता है, तथा विधान मंडल या संसद अथवा सदन के कुल व उपस्थित सदस्य संख्या के दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से कोई विधेयक पारित किया जाता है | जबकि साधारण बहुमत में सभी सदस्यों की उपस्थिति न होने पर भी किसी भी कार्य को करनें में उनकी उपस्थिति 50% माना जाता है, अर्थात 50%+1 का नियम लागू होगा |

यहाँ पर हमनें आपको बहुमत के विषय में बताया, यदि इस जानकारी से सम्बन्धित आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्न आ रहा है, अथवा इससे सम्बंधित अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो कमेंट बाक्स के माध्यम से पूँछ सकते है,  हम आपके द्वारा की गयी प्रतिक्रिया और सुझावों का इंतजार कर रहे है |

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