अध्यादेश क्या होता है, अध्यादेश और विधेयक में अंतर

अध्यादेश क्या है 

भारत के संविधान में अनुच्छेद 123 के अंतर्गत राष्ट्रपति को अध्यादेश पारित करने की शक्ति प्रदान की गयी है, राष्ट्रपति इस शक्ति का प्रयोग तभी कर सकता है, जब संसद का सत्र न चल रहा हो | इस अध्यादेश को अगले सत्र में दोनों सदनों से पास कराना अनिवार्य है, अन्यथा इसकी अवधि समाप्त होने पर यह निष्क्रिय हो जाता है | अध्यादेश का प्रावधान संविधान निर्माताओं न यह विचार करके किया था कि इससे तत्कालीन परिस्थति पर नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है, यदि आप अध्यादेश के विषय में नहीं जानते है, तो इस पेज पर अध्यादेश के बारे में बताया जा रहा है |

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अध्यादेश क्या होता है ?

संसद के सत्र न चलने की स्थति में केंद्र सरकार के अनुमोदन पर राष्ट्रपति के द्वारा जो आदेश या अधिसूचना जारी की जाती है, उसे अध्यादेश कहा जाता है |

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अध्यादेश की अवधि

अकस्मात् परिस्थति को नियंत्रित करने के लिए जारी किये गए अध्यादेश की अवधि न्यूनतम छ: सप्ताह तथा अधिकतम छः मास होती है |

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विधेयक क्या होता है ?

सरकार द्वारा किसी विषय पर नया नियम बनाने के लिए पहले उसका प्रारूप बनाया जाता है, इस प्रारूप में उससे सम्बंधित सभी शर्तों का उल्लेख किया जाता है, जब इस प्रारूप को संसद में पेश किया जाता है, तो इसे विधेयक के नाम से जाना जाता है | इस विधेयक में और संसोधन करते हुए प्रत्येक शब्द का विस्तृत उल्लेख किया जाता है, जिससे स्पष्टता बनी रहे, जब यह विधेयक संसद से पास हो जाता है, तो यह कानून का रूप ले लेता है |

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अध्यादेश और विधेयक में क्या अंतर होता है

अध्यादेश विधेयक
अध्यादेश अस्थायी होता है | विधेयक स्थायी होता है |
अध्यादेश पारित करने के लिए संसद की स्वीकृति आवश्यक नहीं है | विधेयक को पारित करने के लिए संसद की स्वीकृति आवश्यक है |
तत्कालीन परिस्थति को नियंत्रित करने के लिए अध्यादेश जारी किया जाता है | स्थायी कानून बनाने के लिए विधेयक पेश किया जाता है |
अध्यादेश की अवधि न्यूनतम छ: सप्ताह तथा अधिकतम छः मास होती है | विधेयक की अवधि निर्धारित नहीं होती है |
अध्यादेश केन्द्रीय मंत्रिमंडल की सलाह पर राष्ट्रपति के द्वारा जारी किया जाता है | विधेयक संसद की स्वीकृति के बाद राष्ट्रपति के द्वारा जारी किया जाता है |
अध्यादेश तत्कालीन एक कानून लागू करने का आदेश होता है | विधेयक कानून बनाने का एक प्रस्ताव होता है |

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