राज्य में राष्ट्रपति शासन कैसे लगता है ?

राष्ट्रपति शासन के विषय में जानकारी (Information About Presidential Rule)

भारत के संविधान निर्माताओं ने राष्ट्रपति शासन की कल्पना ऐसे समय को ध्यान में रखकर की थी, जिसमें राज्य की एकता, अखंडता और सुरक्षा खतरे में हो | इसके लिए ही संविधान में कुछ ऐसे प्रावधान किये गए जिससे केंद्र सरकार को अधिक शक्ति मिल सके |  जिससे वह बिना किसी रोक- टोक के सख्त निर्णय ले पाए और राज्य के अंदर परिस्थित को नियंत्रित कर सके | किसी भी राज्य में राज्य पाल की रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद ही राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है | इस पेज पर राज्य में राष्ट्रपति शासन कैसे लगता है इसके लिए नियम क्या है, के बारे में बताया जा रहा है |

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राज्य में राष्ट्रपति शासन कैसे लगता है (How Does The President Rule In The State)?

जब किसी राज्य में संविधान के अनुसार प्रशासन नहीं चल पाता है, उस समय राज्य पाल राज्य के हालातों के विषय में राष्ट्रपति को रिपोर्ट सौंपता है | यह रिपोर्ट केंद्रीय सरकार के पास जाती है | इस रिपोर्ट के आधार पर कैबिनेट में चर्चा की जाती है | यदि कैबिनेट को लगता है, राज्य सरकार वहां की स्थिति पर नियंत्रण नहीं रख पायेगी तो वह राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की संस्तुति करता है और रिपोर्ट को राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेज दिया जाता है | राष्ट्रपति इस रिपोर्ट का अध्ययन करते है यदि उन्हें किसी परामर्श की आवश्यकता होती है तो वह परामर्श लेते है | यदि राष्ट्रपति इस रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करके अपनी अनुमति दे देते है, तो उस राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अधिसूचना जारी कर दी जाती है | तब उस राज्य का पूरा प्रशासन केंद्र सरकार के अधीन हो जाता है |

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क्या है नियम (What Is The Law) ?

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का प्रावधान किया गया है | यह प्रावधान इस प्रकार है-
  • यदि राज्यपाल राज्य में सरकार संविधान के अनुसार न चल पाने की रिपोर्ट करता है और उसकी रिपोर्ट को स्वीकार्य कर लिया जाता है, तो उस राज्य में राष्ट्रपति शासन की अधिसूचना जारी कर दी जाती है |
  • यदि केंद्र द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन राज्य सरकार नहीं करती है या करने में विफल रहती है, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है |
  • राष्ट्रपति शासन की अधिसूचना जारी होने के तिथि से 2 महीने के अंदर संसद के दोनों सदनों से सामान्य बहुमत से इसे पास कराना अनिवार्य है, राष्ट्रपति शासन का कार्यकाल 6 माह का होता है, इसे 6-6 माह करके 3 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है |

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