आईआरडीए (IRDA) का फुल फॉर्म क्या है

आईआरडीए (IRDA)  

वर्तमान समय में बीमा योजनाओं का लाभ किसी न किसी तरह से लगभग प्रत्येक व्यक्ति उठा रहा है |  बीमा योजना हमारे देश के आर्थिक विकास में विशेष भूमिका निभाता है। और हमे बीमाधारकों के साथ कई प्रकार की धोकाधड़ी और पैसे फसने या बीमा का पैसा न मिलने के मामलें देखने को मिलते रहते है | बीमा सम्बन्धित इस प्रकार के सभी मामलों का निपटारा करने के लिए आईआरडीए (IRDA) संघठन को बनाया गया, यह बीमा सम्बन्धित किसी भी समस्या का निवारण करता है |

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बीमा अनुबंधों की सीमा सभी क्षेत्रों के लिए भिन्न- भिन्न होती है इसका मतलब कुछ अनुबंधों का समय एक वर्ष का होता है और कुछ बीस वर्षों का या उससे भी अधिक हो सकता हैं और ऐसे अनुबंधों का आकार भी काफी बड़ा रहता है।  बीमा कंपनियों द्वारा दुर्घटना या दुर्घटना के मामलों में बीमाकृत व्यक्ति की प्रतिपूर्ति का आश्वासन तो देते है, परन्तु इसे पूरा नहीं करते है और बीमा कंपनियां अनुबंधों के विशाल आकार के साथ सौदा करती हैं, और इसमें विवाद उत्पन्न हो जाते है | इसी तरह के विवादों को सुलझाने हेतु, सरकार ने एक नियामक नियुक्त  किया है जो गतिविधियों पर निगरानी रखते हुए सभी प्रकार की समस्याओं का निवारण करता है।  इसी प्रकार की बीमा क्षेत्र में आने वाली समस्याओं को देखते हुए भारत सरकार ने निगरानी और समाधान के लिए IRDA नाम की एक एजेंसी की स्थापना की और इस क्षेत्र के विकास की देखरेख की भी जिम्मेदारी इसी एजेंसी को दी है।  IRDA से सम्बन्धित विस्तृत जानकारी कुछ इस प्रकार है –

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IRDA का फुल फॉर्म  –

आईआरडीए का फूल फार्म Insurance Regulatory and Development Authority / बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण होता है | IRDA का मतलब है बीमा भारतीय नियामक और विकास प्राधिकरण होता है | यह एक स्वायत्त और वैधानिक निकाय है जो बीमा को विनियमित और बढ़ावा देता है ।

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जाने IRDA क्या है? 

भारतीय बीमा विनियामक विकास प्राधिकरण (IRDA) एक नियामक संस्था होती है  जिसे बनाने का इरादा एक ही है वो है ‘आपके हितों की रक्षा करना’ । इसके साथ ही यह बीमा संबंधी गतिविधियों की पूरी तरह से निगरानी करता है और बीमा उद्योग को कंट्रोल में रखता हैं इसके विकास की भी देखरेख का काम भी इसी को सौंपा गया है |  IRDA का गठन बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम – IRDA अधिनियम, 1999 द्वारा किया गया था और इसका मुख्य कार्यालय हैदराबाद, तेलंगाना में स्थित है।

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प्राधिकरण का क्या है मुख्य उद्देश्य?

  • पॉलिसीधारकों के हितों और अधिकारों को बढ़ावा देना ।
  • बीमा उद्योग के विकास को बढ़ावा देना और उसे अपनी निगरानी में रखना।
  • बीमा उत्पाद की धोखाधड़ी और चूक को रोकना और वास्तविक दावों का त्वरित निपटान को करना |
  • बीमा से निपटने वाले वित्तीय बाजारों में पारदर्शिता और उचित आचार संहिता पर कार्यों को करना ।

इस अधिनियम के तहत, ही बीमा अधिनियम 1398 के तहत बीमा नियंत्रक को नए प्राधिकरण द्वारा प्रतिस्थापित हुआ है जिसका नाम  Insurance Regulatory and Development Authority (IRDA ) तय करते हुए रखा गया था|

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IRDA के कार्य और कर्तव्य

IRDA अधिनियम, 1999 की धारा 14 IRDA के कर्तव्यों, शक्तियों और कार्यों को पूरा करने का काम करती है |

1.यह बीमा कंपनियों का पंजीकरण कराने के साथ विनियमन भी करती है |

2.पॉलिसीके सरेन्डर मूल्य, बीमा दावों का समाधान, बीमा योग्य ब्याज, पॉलिसी धारकों द्वारा नामांकन, बीमा अनुबंध के अन्य नियम और शर्तों से संबंधित पॉलिसी धारकों के हितों की रक्षाकरना इसका मुख्य कार्य होता है |

3.जनरल इंश्योरेंस मामलों में, पॉलिसी धारक के नुकसानों का आकलन करते हैं, उन्हें आचार संहिता बताया जाना ।

4.बीमा व्यवसाय के संचालन में प्रवीणता को बढ़ावा देती है |

5.इसके साथ ही बीमा और पुनः बीमा व्यवसाय से जुड़े प्रोफेशनल ऑर्गनाइजेशन को बढ़ावा देने और उसका विनियमन करती है |

7.बीमाकर्ताओं और बिचौलियों के बीच होने वाले विवादों को सुलझाने का काम करती है |

8.ग्रामीण या सामाजिक क्षेत्र में बीमाकर्ता द्वारा स्वीकार किए जाने वाले जीवन बीमा व्यवसाय और सामान्य बीमा व्यवसाय  का पूरा लेखा जोखा रखती है |

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IRDA की संरचना

IRDA एक दस लोगों का संघठन है जो इस प्रकार है –

  • एक अध्यक्ष होता है जिसका कार्यकाल पाँच वर्ष और उसके लिए अधिकतम आयु 60 वर्ष है |
  • पाँच पूर्णकालिक सदस्य इनका कार्यकाल पाँच वर्ष और अधिकतम आयु 62 वर्ष रखी गई है |
  • चार अंशकालिक सदस्य – पाँच वर्ष से अधिक नहीं
  • अध्यक्ष और आईआरडीए के सदस्यों की नियुक्ति भारत सरकार द्वारा की जाती हैं ।

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IRDAI की गई स्थापना 

बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDA) की स्थापना भारत सरकार ने किया। इसका उद्देश्य बीमा की पालसी धारकों के हितों कि रक्षा करना, बीमा उद्योग का क्रमबद्ध विनियमन, संवर्धन तथा संबधित व आकस्मिक मामलों पर तुरंत कार्यवाही करना है। इसका मुख्यालय हैदराबाद में है। इसकी स्‍थापना संसद के अधिनियम आईआरडीए अधिनियम, 1999 द्वारा किया गया था |

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