ए पी जे अब्दुल कलाम के विचार

ए पी जे अब्दुल कलाम के प्रेरक प्रसंग

डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम भारत के पूर्व राष्ट्रपति और एक महान वैज्ञानिक थे | भारत की सुरक्षा में इनके योगदान के कारण इन्हें मिसाइल मैन के नाम से जाना जाता है |  कलाम जी नें भारत को एक परमाणु संपन्न राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी | यह भारत की उन्नति में शिक्षा के स्तर को और उच्च करना चाहते थे | डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के विचारो के बारे में आपको इस पेज पर विस्तार से बता रहे है |

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अब्दुल कलाम जी के विचार

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  • शिखर तक पहुँचने के लिए ताकत चाहिए होती है, चाहे वो माउन्ट एवरेस्ट का शिखर हो या कोई दूसरा लक्ष्य।
  • अपने Job से प्यार करो पर अपनी Company से प्यार मत करो क्योकि आप नहीं जानते कि कब आपकी Company आपको प्यार करना बंद कर दे |
  • सफलता की कहानियां मत पढ़ो, उससे आपको केवल एक सन्देश मिलेगा | असफलता की कहानियां पढ़ो, उससे आपको सफल होने के कुछ ideas (विचार) मिलेंगे |
  • सीखना, रचनात्मकता को जन्म देता है | रचनात्मकता, विचार की ओर ले जाती है, विचार आपको ज्ञान देता है | ज्ञान आपको महान बना देता है।
  • विचार, धन है, हिम्मत रास्ता है | कड़ी मेहनत समाधान है |
  • सपने तभी सच होते है, जब हम सपने देखना शुरू करते है |
  • सपने हमारे तभी सच हो सकते है, जब सपनो को पूरा करने के लिए अपनी नीद तक का त्याग कर दे |
  • पहली बार की सफलता हमारी किस्मत पर निर्भर हो सकती है, लेकिन बार-बार की सफलता हमारे मेहनत और लगन का ही परिणाम होता है |
  • “जीवन में सुख का अनुभव तभी प्राप्त होता है, जब इन सुखो को कठिनाईओ से प्राप्त किया जाता है” |
  • “सबके जीवन में दुःख आते है, बस इन दुखो में सबकी धैर्य की परीक्षा ली जाती है” |

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आविष्कार

डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम वर्ष 1962 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से जुड़े थे | भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह (एस.एल.वी. तृतीय) प्रक्षेपास्त्र बनाने का श्रेय अब्दुल कलाम को ही दिया जाता है | यह उस समय परियोजना महानिदेशक थे, कलाम जी के योगदान के कारण ही भारत अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन पाया |

इसरो लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम करने का श्रेय इन्हें ही प्राप्त है, इन्होंने ने स्वदेशी लक्ष्य भेदी नियंत्रित प्रक्षेपास्त्र (गाइडेड मिसाइल्स) के डिजाइन का निर्माण किया था, इन्होंने अग्नि एवं पृथ्वी मिसाइलों का निर्माण करने के लिए स्वदेशी तकनीक को विकसित किया | इन्होंने आग्नेयास्त्रों के रूप में रणनीतिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली का उपयोग किया | यह भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार भी थे | इन्होंने भारत के परमाणु कार्यक्रम को सफल बनाया इन्होंने पोखरण में परमाणु परिक्षण करके भारत को एक परमाणु संपन्न राष्ट्र के रूप में पहचान दिलाई | इन्होंने वर्ष 1998 में पोखरण में दूसरा सफल परमाणु परीक्षण किया |

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प्रेरक प्रसंग

डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम जब छोटे थे, तो वह एक दिन अपने माता-पिता के साथ भोजन कर रहे थे, भोजन करते करते समय उन्होंने अपने पिता की थाली देखी ,उसमे कुछ जली हुई रोटियां थी, जिन्हें उनके पिता शांति के साथ खा रहे थे, उनकी माता जी ने जली हुई रोटियों के लिए उनके पिता जी से क्षमा मांगी, तो वे हँसते हुए बोले, “कोई बात नहीं, मुझे तो जली हुई रोटियाँ पसंद है” |

यह बात सुनकर कलाम जी आश्चर्य में पड़ गये, कुछ समय के बाद उन्होंने अपने पिता जी से पूछा क्या सचमुच में उन्हें जली हुई रोटियाँ पसंद है ? तो उनके पिता जी ने उत्तर दिया, “एक जली हुई रोटी किसी का कुछ नहीं बिगाड़ सकती, लेकिन जले हुए शब्द बहुत कुछ बिगाड़ सकते हैं” |

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