महात्मा गांधी के आंदोलन के नाम

महात्मा गांधी द्वारा किये गये आन्दोलन   

भारत के राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी जी नें भारत को अंग्रेजो से स्वतंत्र करवाने के लिए अनेक आंदोलनों का संचालन किया, जिसके परिणाम स्वरूप अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर विवश होना पड़ा | गांधी जी को सबसे पहले सुभाष चन्द्र बोस ने वर्ष 1944 में रंगून रेडियो से ‘राष्ट्रपिता’ कहकर सम्बोधित किया था | गाँधी जी नें जीवन भर अहिंसा और सत्य का पालन किया और लोगों से भी इसका पालन करने के लिये कहा था | इस पेज पर आपको महात्मा गांधी जी के आन्दोलनों और उनके विचार के विषय में जानकारी दे रहे है |

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महात्मा गांधी जी के आन्दोलन

महात्मा गांधी जी के आन्दोलन इस प्रकार है –

चम्पारण सत्याग्रह  – 1917

भारत के बिहार राज्य में ब्रिटिश ज़मींदार किसानों को खाद्य फसलों को उगानें नहीं  देते थे | जमींदार किसानों को नील की खेती करने के लिए मजबूर करते थे और उनकी खरीद बहुत ही सस्ते दामों पर करते थे, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति बहुत ही कमजोर होती जा रही थी | गाँधी जी नें जमींदारों के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन और हड़तालों का नेतृत्व किया | जिसके बाद गरीब और किसानों की मांगों को माना गया |

खेड़ा सत्याग्रह – 1918

वर्ष 1918 में गुजरात के खेड़ा में बाढ़ और सूखे के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति बहुत ही ख़राब हो गयी, जिस कारण वह कर माफ़ी की मांग कर रहे थे, परन्तु अंग्रेजो के द्वारा कर के लिए किसानों का उत्पीड़न किया जाता था और उन्हें बंदी बना लिया जाता था | गाँधी जी के मार्गदर्शन में सरदार पटेल ने अंग्रेजों के साथ इस समस्या पर विचार विमर्श के लिए किसानों का नेतृत्व किया, जिसके बाद अंग्रेजों ने कर माफ़ करके सभी बंदियों को रिहा कर दिया था |

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अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन – 1918

गाँधी जी ने वर्ष 1918 अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन किया | इस आंदोलन का मुख्य कारण मिल मालिकों द्वारा दिए जाने वाले बोनस को समाप्त करना था | बाद में मिल मालिक 20 प्रतिशत बोनस देने की सहमति दी परन्तु उस समय महंगाई को देखते हुए 35 प्रतिशत बोनस की मांग की गयी, जिसे ट्रिब्यूनल के द्वारा स्वीकार किया गया | इससे गाँधी जी लोकप्रियता में बहुत बढ़ोत्तरी हुई |

खिलाफत आन्दोलन – 1920

खिलाफत आन्दोलन एक विश्वव्यापी आन्दोलन था | इसका मुख्य कारण तुर्की के खलीफा का प्रभुत्व अंग्रेजों के द्वारा कम करना था | इससे सारे विश्व के मुसलमानों में अंग्रेजों के प्रति रोष था | भारत में खिलाफत का नेतृत्व ‘आल इंडिया मुस्लिम कांफ्रेंस’ द्वारा किया गया था | गाँधी जी ने इस आंदोलन के मुख्य प्रवक्ता थे | इन्होंने अंग्रेजों द्वारा दिए सम्मान और मैडल को वापस कर दिया, जिससे गाँधी जी भारत के सभी समुदायों के लोगों के प्रमुख नेता बन गए |

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असहयोग आंदोलन – 1920

गाँधी जी मानते थे कि अंग्रेज भारतीयों के सहयोग से अपनी सत्ता भारत में स्थापित कर पाए है, यदि हर भारतीय के द्वारा अंग्रेजों का असहयोग किया जाये, तो वह देश छोड़ कर चले जायेंगे | गाँधी जी ने 1920 से लेकर 1922 तक असहयोग आंदोलन का संचालन किया, जिससे यह भारत के एक लोकप्रिय नेता बन गए |

नमक आंदोलन (सविनय अवज्ञा आंदोलन) – 1930

गाँधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की इसका अर्थ था कि बगैर हिंसा किये सरकारी कानूनों  को तोड़ना, जिसकी शुरुआत गाँधी जी ने नमक कानून का उलंघन करके किया | इस आंदोलन के द्वारा भारतीय जनता का ध्यान देश की आजादी को प्राप्त करने के लिए गाँधी जी द्वारा मोड़ा गया |

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भारत छोड़ो आंदोलन – 1942

भारत को आजादी दिलाने में गाँधी जी द्वारा चलाये गए भारत छोड़ो आंदोलन का बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है | इस आंदोलन में गाँधी जी ने ‘करो या मरो’ का नारा दिया जिससे भारत की जनता अंग्रेजों के प्रति बहुत ही आक्रोशित हो गयी, जिससे ब्रिटिश गवर्मेंट ने भारत को आजाद करने का फैसला किया |

गाँधी जी के विचार

  • व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित प्राणी है, वह जो सोचता है वही बन जाता है |
  • अपने प्रयोजन में दृढ विश्वास रखने वाला एक सूक्ष्म शरीर इतिहास के रुख को बदल सकता है |
  • हमेशा अपने विचारों, शब्दों और कर्म के पूर्ण सामंजस्य का लक्ष्य रखें, हमेशा अपने विचारों को शुद्ध करने का लक्ष्य रखें और सब कुछ ठीक हो जायेगा |
  • आँख के बदले में आँख पूरे विश्व को अँधा बना देगी |
  • थोडा सा अभ्यास बहुत सारे उपदेशो से बेहतर है |
  • खुद वो बदलाव बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं |
  • विश्वास को हमेशा तर्क से तौलना चाहिए, जब विश्वास अँधा हो जाता है तो मर जाता है |
  • पहले वो आप पर ध्यान नहीं देंगे, फिर वो आप पर हँसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, और तब आप जीत जायेंगे |

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महात्मा गांधी जी के बेटो का नाम

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