महात्मा गांधी पर हिन्दी में निबंध

महात्मा गांधी पर गीत, कविता, भाषण 

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में गाँधी जी का नाम सदैव अंकित रहेगा । ‘ बापू जी ‘ के नाम से विख्यात गाँधी जी एक युगपुरुष थे । वह भारत ही नहीं अपितु विश्व के महान पुरुषों में से एक थे । राष्ट्र उन्हें ‘ राष्ट्रपिता ‘ के नाम से संबोधित करता है । भारत के स्वतंत्र  होने के बाद संविधान सभा नें इन्हें भारत के राष्ट्रपिता का पद प्रदान किया | गाँधी जी नें  भारत की आजादी दिलवाने में बहुत ही संघर्ष किया इन्होंने अपने अहिंसा धर्म का पालन करते हुए ब्रिटिश गवर्नमेंट को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया | गांधीजी नें सभी से अहिंसा और सत्य का पालन करने को कहा है | इस पेज पर गाँधी जी के गीत,कविता और भाषण के बारे में आपको विस्तार से बता रहे है |

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महात्मा गांधी पर हिन्दी में निबंध

महात्मा गाँधी

1.महात्मा गाँधी जी को भारत का राष्ट्रपिता कहा जाता है, यह भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी और अहिंसक कार्यकर्ता थे | जिन्होंने भारत को आजादी दिलाई | इनका जन्म  2 अक्टूबर 1869 को  भारत के गुजरात राज्य के पोरबन्दर नामक स्थान पर हुआ था | इन्होंने जीवन भर अहिंसा के धर्म का पालन किया | इसी कारण इनके जन्म दिवस को सम्पूर्ण विश्व में अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है |

2.गाँधी जी 18 वर्ष की आयु में इग्लैंड में वकालत सीखने के लिए गए थे, वहां पर इन्होंने तीन वर्ष तक कानून का अध्ययन किया | पढ़ाई पूरी करने के बाद वह भारत वापस आ गए | यहां पर उनको साउथ अफ्रीका में एक केस के लिए जाना पड़ा | साउथ अफ्रीका में इन्होंने अपने जीवन के बीस वर्ष व्यतीत किये | साउथ अफ्रीका में भारतीयों को बहुत ही अपमानित किया जाता था | इसके लिए गाँधी जी ने आन्दोलन कर के भारतीयों का हक़ दिलवाया था |

3.गाँधी जी भारत वापस आ गए यहाँ पर उन्होंने एक वर्ष तक भारत में घूम कर यहाँ की परिस्थिति को समझने का प्रयास किया | इसके बाद गाँधी जी ने कई आंदोलनों का संचालन किया | जिससे अंग्रेज भयभीत होने लगे | इन्ही आंदोलनों में सबसे महत्वपूर्ण आंदोलन भारत छोड़ो आंदोलन 1942 इस आंदोलन ने पूरे भारत की तस्वीर ही बदल दी | अंग्रेजों को भारत छोड़कर जाना पड़ा | अंग्रेज जाते-जाते  भारत को दो भागों में विभाजित कर गए एक भारत और दूसरा पाकिस्तान |

4.भारत को आजादी 15 अगस्त 1947 को प्राप्त हुई थी | 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने महात्मा गाँधी जी की हत्या कर दी थी | इस तरह वह भारत को आजाद कराने के बाद शून्य में विलीन हो गए |

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महात्मा गांधी पर गीत

जिसको पाकर मुक्त हुआ था, भारतमाता का उपवन।

आओ आज सुनाएं तुमको, बापू का निर्मल जीवन ।।

अठ्ठारह सौ उनहत्तर में, अक्टूबर महीना आया।

तभी हुलसकर पुतली माता ने, प्यारा बेटा जाया ।।

पोरबंदर, दीवान करमचंद के, घर में खुशियां छाईं।

नित्य नए आनंद और फिर, पढ़ने की बेला आई ।।

उम्र अभी छोटी ही थी पर, पिता स्वर्ग सिधार गए।

करके मैट्रिक पास यहां, फिर मोहन भी इंग्लैंड गए ।।

पढ़-लिख मोहन हो गए, बुद्धिवान-गुणवान।

ज्ञानवान, कर्तव्य प्रिय, रखे आत्मसम्मान।।

जिसको पाकर……………………………………….।।1।।

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दक्षिण अफ्रीका में लड़ने को, एक मुकदमा था आया।

पगड़ी धारण करके गांधी, उस वक्त अदालत में आया।।

कितनी उंगली उठीं कोई, गांधी को न झुका पाया।

मैं भारतवासी हूं, संस्कृति का, मान मुझे प्यारा।।

थे रोज देखते, कालों का, अपमान वहां होता रहता।

यह देख-देखकर मोहन का मन, जार-जार रोता रहता।।

तभी एक दिन ठान ली, दूर करूं अन्याय।

चाहे कुछ करना पड़े, दिलवाऊंगा न्याय।।

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जिसको पाकर……………………………………….।।2।।

कितने ही आंदोलन करके, गांधी ने बात बढ़ाई थी।

जितने भी काले रहते थे, उन सबकी शान बढ़ाई थी।।

फिर भारत में वापस आकर, वे राजनीति में कूद पड़े।

प्रथम युद्ध में, शामिल होकर अंग्रेजों के साथ रहे।।

अंग्रेजों का यह कहना था, यदि विजय उन्हें ही मिल जाए ।

तो भारत को आजाद करें, और अपने वतन पलट जाएं।।

लेकिन हमको क्या मिला, जलियांवाला कांड।

सुनकर के जिसकी व्यथा, कांप उठा ब्राह्मण।।

जिसको पाकर……………………………………….।।3।।

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नमक और भारत छोड़ो आंदोलन को, फिर अपनाया।

फिर शामिल होकर गोलमेज में, भारत का हक बतलाया।।

भारत छोड़ो का नारा अब, घर-घर से उठता आता था।

इस नारे को सुन-सुनकर अब, अंग्रेज राज थर्राता था।।

सारे नेता जेलों में थे, कर आजादी का गान रहे।

हो प्राण निछावर अपने पर, इस मातृभूमि का मान रहे।।

देख यहां की स्थिति, समझ गए अंग्रेज।

यह फूलों की है नहीं, यह कांटों की सेज।।

जिसको पाकर……………………………………….।।4।।

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महात्मा गाँधी का भाषण

“मैं यह कहने की हिम्मत करता हूँ कि भारत में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच यह संघर्ष ब्रिटिश आगमन की एकजुटता का कारण है और तुरंत इस संबंध को ग्रेट ब्रिटेन और भारत के बीच दुर्भाग्यपूर्ण, कृत्रिम व अप्राकृतिक संबंधों से प्राकृतिक संबंधो में परिणत कर दिया जाता है। अगर ऐसा होता है, तो स्वैच्छिक साझेदारी को छोड़ दिया जाए, अगर दोनों में से एक भी पार्टी भंग हो जाती है, तो आपको प्रतीत होगा कि हिन्दू, मुसलमान, सिख, यूरोपीय, एंग्लो इंडियन, ईसाई, अछूत, सभी एक साथ एकजुटता से रहते हैं” |

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 महात्मा गाँधी की स्पीच (अंग्रेजी में)

 “We have resolved to utilize all our resources in the pursuit of an exclusively non-violent struggle. Let no one commit a wrong in anger.”

महात्मा गाँधी पर कविता

अब भारत नया बनाएँगे, हम वंशज गाँधी के,

पुस्तक-अख़बार जलाएँगे, हम वंशज गाँधी के,

जनता की पीर हुई बासी, क्या मिलना गाकर भी,

बस वंशावलियां गाएँगे, हम वंशज गाँधी के,

बापू की बेटी बिकी अगर, इसमें हम क्या कर लें,

कुछ नारे नए सुझाएँगे, हम वंशज गाँधी के,

खाली हाथों से शंका है, अपराध न हो जाए |

इन हाथों को कटवाएँगे, हम वंशज गाँधी के,

रथ यात्रा ऊँची कुर्सी की, जब-जब भी निकलेगी |

पैरों में बिछते जाएँगे, हम वंशज गाँधी के |

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महात्मा गाँधी पर शायरी

1.सत्य अहिंसा का था वो पुजारी,

कभी ना जिसने हिम्मत हारी,

सांस दी हमें आज़ादी की,

जन जन जिसका है आभारी |

2.देश के लिए जिसने विलास को ठुकराया था |

त्याग विदेशी धागे उसने खुद ही खादी बनाया था |

पहन के काठ के चप्पल जिसने सत्याग्रह का राग सुनाया था |

देश का था अनमोल वो दीपक जो महात्मा कहलाया था |

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