मदर टेरेसा निबंध इन हिंदी मराठी

मदर टेरेसा (Mother Teresa)

मदर टेरेसा भारतीय नहीं थीं, फिर भी उन्होंने हमारे भारत देश को बहुत कुछ दिया | वह बहुत ही धार्मिक और कोमल ह्रदय वाली महिला थी | वह लोगों की सेवा पूरी निष्ठा और प्यार के साथ करती थी | वह गरीब और बीमार लोगों के लिए एक वरदान के रूप में थी | अपनी परोपकारी सेवा के कारण सब इन्हें अपनी माँ के रुप में मानते थे | भारत में इन्हें “अंधेरे की दुनिया में एक प्रकाश” के रुप में जाना जाता है | वर्ष 2016 के सितम्बर महीने में इन्हें ‘संत’ की उपाधि उन्हें 19 वीं पुण्य तिथि पर प्रदान की गयी, जिसकी आधिकारिक पुष्टि वेटिकन से हुई थी | मदर टेरेसा के बारे में आपको इस पेज पर विस्तार से बता रहे है |

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 मदर टेरेसा का जन्म और पूरा नाम

मदर टेरेसा जी का नाम अगनेस गोंझा बोयाजिजू था | इनके परोपकारी कार्यों के कारण इन्हें मदर की उपाधि प्रदान की गयी बाद में यह मदर टेरेसा के नाम से सम्पूर्ण विश्व में प्रसिद्ध हो गयी थी | इनका जन्म एक धार्मिक कैथोलिक परिवार में मेसेडोनिया के सोप्जे में 26 अगस्त 1910 को हुआ था | अपनी 18 वर्ष की आयु में इन्होंने नन बनने के निर्णय किया तथा एक इंस्टिट्यूट के माध्यम से इन्होंने नन का प्रशिक्षण प्राप्त किया |

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इस इंस्टिट्यूट के द्वारा यह भारत आयी | इन्हें मिशनरी स्कूल में पढ़ाने के लिए भेजा गया | इसके कुछ दिन बाद इन्हें कलकत्ता में लोगों की सेवा करने के लिए भेज दिया गया | कलकत्ता में डबलिन की सिस्टर लोरेटो ने संत मैरी स्कूल स्थापना की थी | इसी विद्यालय में वह शिक्षक के रूप में कार्य करने लगी | वहां पर वह इतिहास और भूगोल विषय पढ़ाती थी |

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मदर टेरेसा का सेवा भाव   

उस समय कलकत्ता में कुष्ठ रोग और प्लेग की बीमारी बहुत ही बड़े स्तर पर फैली थी | इन बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों की सेवा मदर टेरेसा ने निस्वार्थ भाव से की | यह अपने हाथो से रोगियों के घावों को साफ करती तथा उसका उपचार करती थी | इनकी सेवा भाव और स्कूल में शिक्षा प्रदान करने के लगाव के कारण वर्ष 1944 में संत मैरी स्कूल की प्रधान अध्यापक का पद दे इन्हें दे दिया गया |

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7 अक्टूबर 1950 को इन्हें मिशनरी ऑफ़ चैरिटी बनाने की स्वीकृति प्रदान कर दी गयी | मिशनरी ऑफ़ चैरिटी के माध्यम से इन्होंने गरीब लोगों के लिए नर्सिंग होम, अनाथालय और वृद्ध आश्रम का निर्माण कराया | मान्यता प्राप्त करने के समय इस संस्था में मात्र 12 लोग थे | आज के समय में इस संस्था में 4000 से अधिक नन कार्य कर रही है तथा इसकी शाखा 100 से अधिक देशों में है |

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 मृत्यु

मदर टेरेसा जी को किडनी और दिल की बीमारी थी | जिस कारण इन्हें कई बार दौरा आ चुका था | बीमारी अधिक बढ़ जाने के कारण इन्होंने वर्ष 1997 को मिशनरी ऑफ़ चैरिटी के प्रमुख पद से त्याग पत्र दे दिया था | इसके बाद मैरी निर्मला जोशी को पद की जिम्मेदारी दे दी गई | 5 सितम्बर 1997 को मदर टेरेसा का कलकत्ता में देहांत हो गया |

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