अविश्वास प्रस्ताव और विश्वास मत क्या है?

अविश्वास प्रस्ताव और विश्वास मत के विषय में जानकारी

भारतीय संविधान में बहुमत प्राप्त करने के बाद सरकार का गठन किया जाता है | बहुमत सिद्ध के बाद ही सरकार अपना कार्य कर सकती है | यदि विपक्ष को ऐसा लगता है, कि सरकार अल्प मत में है तो वह अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है | अविश्वास प्रस्ताव में सरकार द्वारा अपने पक्ष में सदस्यों को वोट करना होता है और बहुमत का आंकड़ा पार करना होता है | इस पेज पर  विश्वास मत क्या है, Trust Vote Meaning in Hindi , अविश्वास प्रस्ताव के विषय में बताया जा रहा है |

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विश्वास मत क्या है (Trust Vote)?

विश्वास मत एक संसदीय प्रक्रिया है, इसे नियम 184 के अंतर्गत कराया जाता है, इस प्रस्ताव पर सदन में वोटिंग कराई जाती है, जिसके बाद यह ज्ञात हो जाता है, कितने सदस्य सरकार के पक्ष में है और कितने सदस्य सरकार के खिलाफ है | विश्वास मत का प्रस्ताव सत्ताधारी सरकार के द्वारा ही लाया जाता है | इसका लाने का उद्देश्य सदन में शक्ति प्रदर्शन करना है |

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अविश्वास प्रस्ताव क्या है (No Confidence Motion)?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 118 में सदन को अपनी कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए नियम बनाने का अधिकार प्रदान किया गया है | इस अनुच्छेद 118 के अंतर्गत ही लोकसभा में नियम 198 का प्रावधान किया गया है | इसमें कोई भी सांसद लिखित रूप से लोकसभा अध्यक्ष को अविश्वास प्रस्ताव लाने का आग्रह करता है | इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष इस प्रस्ताव को पढ़कर सभी सदस्यों को सुनाता है, यदि इसके पक्ष में 50 सांसद अपनी स्वीकृति दे देते है, तो इस प्रस्ताव पर चर्चा की जाती है |

चर्चा करने के लिए एक तिथि का निर्धारण किया जाता है | निर्धारित तिथि को चर्चा की जाती है और चर्चा करने के बाद मतदान किया जाता है | यदि मतदान में सरकार बहुमत प्राप्त कर लेती है, तो अगले छ: महीने तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है, यदि सरकार बहुमत नहीं प्राप्त कर पाती है, तो सरकार गिर जाती है | यह प्रक्रिया लोकसभा और राज्य विधान सभा के लिए एक ही है | बहुमत न सिद्ध होने पर प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र सौपतें है और राज्य में मुख्यमंत्री राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौपतें है |

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