पुलिस कमिश्नर (Commissioner System) सिस्टम क्या है

हिंदी फिल्मो में आपने ACP, DCP, कमिश्नर का नाम तो बहुत बार सुना होगा और वो भी मुंबई, पुणे जैसी सिटी में, दोस्तों हालाकि अभी यह कमिश्नर प्रणाली आम लोगो की समझ से बहुत दूर है पर बड़े – बड़े शहरो में ये व्यवस्था लागू है जिसमे दिल्ली, मुंबई सहित 100 महानगर शामिल है| ये सब कमिश्नर सिस्टम (Commissioner System) में कानून व्यवस्था का हिस्सा है, जिसके बारे में आज हम बहुत विस्तार से जानेंगे|

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कमिश्नर सिस्टम किसे कहते है (Commissioner System in Hindi)

अंग्रेजो के समय से प्रचलित यह कानून व्यवस्था आजादी से पहले लागू थी, जिसे आजादी मिलने के बाद में इसे पुलिस सिस्टम में रखा गया और आज भी ये भारत के 100 महानगरो में लागू है| कमिश्नर सिस्टम के अनुसार भारतीय पुलिस अधिनियम, 1861 के भाग 4 जिला अधिकारी को पुलिस नियन्त्रण के कुछ अधिकार देती है तथा दण्ड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को कानून और व्यवस्था के अधिकार देती है |

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कमिश्नर प्रणाली में पुलिस के अधिकार (Power & Rights)

कमिश्नर प्रणाली के लागू होने से एसडीएम और एडीएम को दी गई एग्जीक्यूटिव मैजिस्टेरियल अधिकार वापस पुलिस के आधीन हो जायेंगे| जिससे बहुत प्रकरण में पुलिस अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और रासुका भी लगा सकती है, बिना कमिश्नर प्रणाली वाले जिलो में ये अधिकार जिला अधिकारी के पास होते है | इसी प्रकार के बहुत से कार्य बिना जिलाधिकारी की सहमति के बिना नहीं किया जा सकते|

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पुलिस कमिश्नर सिस्टम के लागू होने से पुलिस के अधिकार में वृद्धि हो जाती है तथा किसी भी आकस्मिक स्थिति में पुलिस अधिकारी अपना कर्तव्य बिना जिलाधिकारी, अन्य अधिकारीयों के आदेश के बिना निभा सकती है| इस प्रणाली में जिले की कानून व्यवस्था कमिश्नर के पास रहेगी| इसमें होटल के लाइसेंस, बार के लाइसेंस, हथियार के लाइसेंस आदि के आवंटन के आधिकार भी शामिल है और जिले में धरना प्रदर्शन की अनुमति देना ना देना, दंगे के दौरान लाठी चार्ज होगा या नहीं, कितना बल प्रयोग अब यह सब पुलिस अधिकारी ही तय करेंगे|

साथ ही जमीन की पैमाइश से लेकर जमीन संबंधी विवादों के निस्तारण से जुड़े तमाम अधिकार भी पुलिस को मिल जायेगे|

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कमिश्नर सिस्टम का रैंकिंग सिस्टम या पद (Ranking & Post)

कमिश्नर प्रणाली में पुलिस कमिश्नर को सबसे ऊचा पद माना गया है जोकि किसी प्रदेश के DIG या IG रैंक के आईपीएस अधिकारी को ही दिया जाता है| पुलिस कमिश्नर को ज्यूडिशियल पॉवर के साथ मजिस्ट्रेट के अधिकार भी दी गए है |

1पुलिस आयुक्त या कमिश्नर – सीपी
2संयुक्त आयुक्त या ज्वॉइंट कमिश्नर –जेसीपी
3डिप्टी कमिश्नर – डीसीपी
4सहायक आयुक्त- एसीपी
5पुलिस इंस्पेक्टर – पीआई
6सब-इंस्पेक्टर – एसआई

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पुलिस कमिश्नर सिस्टम कैसे काम करता है

कमिश्नरी प्रणाली लागू के बाद क्षेत्र में कमिश्नर का मुख्यालय बनाया जाता है | इसमें सीनियर आईपीएस को पुलिस कमिश्नर का भार दिया जाता है और महानगर को कई जोन में विभाजित कर दिया जाता है | इसके बाद में हर एक जोन डीसीपी की नियुक्ति की जाती है | इसके नीचे एसीपी को तैनात किया जाता है जो 2 से 4 थानों को सम्भालते है इससे पहले ये कार्य सीओ को दिया जाता था |