फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) क्या है

फास्ट ट्रैक कोर्ट की जानकारी (About Fast Track Court) 

पिछले कुछ वर्षों से देश में बाल यौन शोषण की घटनाओं ने मानव समाज का सिर शर्म से झुका दिया है| हालाँकि सरकार की ओर से निरंतर प्रयास जारी है, परन्तु कायदे-कानून कड़े किए जाने के बावजूद घटनाओं का ग्राफ कम नहीं हो रहा है| प्रतिदिन किसी न किसी राज्य से बाल यौन शोषण की खबरें सुनने को मिलती है| सर्वोच्च न्यायालय ने यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा अधिनियम (पॉक्सो) के अनार्गत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करने का निर्देश दिया है। सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश के तहत देशभर में इसके लिए 1023 फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन होगा। फास्ट ट्रैक कोर्ट क्या है? इसके बारें में आपको इस पेज पर विस्तार से बता रहे है|

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फास्ट ट्रैक कोर्ट क्या है (Fast Track Court Kya Hai)

देश में फास्‍ट ट्रैक कोर्ट्स की शुरुआत वर्ष 2000 में की गई थी। उस समय इन कोर्ट्स को शुरू करने का उद्देश्य देश की निचली अदालतों में रुके हुए मुकदमों का निपटारा करना था। एक अनुमान के अनुसार तीन करोड़ से अधिक केस ऐसे हैं, जिनका अभी तक कोई निष्‍कर्ष नहीं निकला। वर्ष 2000 में 11वें वित्‍त आयोग के अंतर्गत इस तरह के 1734 फास्‍ट ट्रैक कोर्ट्स की स्वीकृति  दी गई थी, परन्तु वर्ष 2005 तक इसमें से मात्र 1562 अदालतें ही अस्तित्‍व में आ सकी।

16 दिसंबर 2012 की त्रासदी हुई और सब कुछ बदल गया। 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ गैंगरेप और निर्ममता से उसकी हत्‍या ने सरकार को अपने फैसले पर पुर्नविचार करने के लिए विवश कर दिया। इस केस ने फास्‍ट ट्रैक कोर्ट्स को एक नई दिशा दी। केंद्र सरकार ने इन अदालतों की समय-सीमा मार्च 2015 तक बढ़ाने का निर्णय किया। इन सभी अदालतों को मुख्य रूप से यौन उत्‍पीड़न और बलात्‍कार जैसे केसेज से निबटने के लिए ही तैयार किया गया था।

प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस एक्ट को पॉक्सो कहा जाता है। देश में निरंतर बढ़ती यौन अपराध की घटनाओं को रोकने के लिए बने पॉक्सो कानून के अंतर्गत मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। इसके अभियुक्तों को जल्द सजा दिलाने के लिए देशभर में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया है।

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सर्वोच्च न्यायालय का आदेश (Supreme Court Order)

सर्वोच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा अधिनियम (पॉक्सो) के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करने का निर्देश दिया है। सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश के तहत देशभर में इसके लिए 1023 फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन होगा। इसमें 389 सिर्फ पॉक्सो और शेष 634 कोर्ट पॉक्सो व बलात्कार के मामलों की सुनवाई करेंगे।

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सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के हाईकोर्ट को कहा कि पॉक्सो के तहत सभी मामलों का फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिये निपटारा किया जाए| सभी राज्यों के हाईकोर्ट तीन जजों की एक कमेटी भी बनाएंगे, जो निचली अदालत में चल रहे फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट का मॉनिटर करेगी| सभी राज्यों के DGP एक टीम बनाएंगे, जो पॉक्सो एक्ट संबंधी मामलों की जांच करेगी और सुनिश्चित करेगी कि गवाह सुनवाई के दौरान अदालत में पेश हो| नए कानून के अनुसार अब ऐसे मामलों में दो महीने में जांच पूरी होगी और दो माह में ट्रायल पूरा किया जाएगा, और ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ 6 माह के अन्दर अपील की जा सकेगी|

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100 से अधिक लंबित मामलों पर फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court On More Than 100 Pending Cases)

पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत दर्ज मामलों में जहां लंबित ट्रायल की संख्या सौ से अधिक है, वहां फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जायेगा । वर्तमान में पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत सुनवाई के लिए विशेष कोर्ट का गठन किया गया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के कोर्ट को विशेष कोर्ट के रूप में परिवर्तित किया गया है। हालांकि इन विशेष कोर्ट में पॉक्सो के साथ दूसरे आपराधिक मामलों की भी सुनवाई होती है। इसके चलते मामले के निपटारे में काफी विलंब होता है। फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन से मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और अभियुक्तों को जल्द से जल्द सजा दी जा सकेगी।

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फास्ट ट्रैक कोर्ट कार्य कैसे करता है (Working Of Fast Track Court)  

फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का निर्णय उस राज्य की सरकार हाई कोर्ट से विचार-विमर्श के बाद करती है। हाईकोर्ट फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए टाइमलाइन निर्धारित कर सकता है, कि सुनवाई कब तक पूरी होनी है। फास्ट ट्रैक कोर्ट टाइमलाइन के आधार पर यह निर्धारित करता है, कि मामले को प्रतिदिन सुनना है, या कुछ दिनों के अंतर पर सुनना है। सभी पक्षों को सुनने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट निर्धारित टाइमलाइन में अपना निर्णय सुनाता है।

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यहाँ पर हमनें फास्ट ट्रैक कोर्ट के विषय में बताया| यदि इस जानकारी से सम्बन्धित आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्न आ रहा है, अथवा इससे सम्बंधित अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो कमेंट बाक्स के माध्यम से पूँछ सकते है,  हम आपके द्वारा की गयी प्रतिक्रिया और सुझावों का इंतजार कर रहे है|  

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