रेरा (RERA) कानून (ACT) क्या है नियम क्या है और इसमें शिकायत कैसे करें

रेरा कानून क्या है नियम क्या है 

भारत सरकार नें वर्ष 2017 में एक एक्ट लागू किया था, जिसके अंतर्गत रियल एस्टेट अर्थात जमीन अथवा प्रॉपर्टी से सम्बंधित सभी गैर-कानूनी कार्यो को प्रतिबंधित किया जा सके |  इस एक्ट का नाम ‘रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट रखा गया, अनेको स्थानों पर बिल्डरो और प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा एक लंबे समय से गैर-कानूनी रूप से कस्टमर से पैसे लिए जा रहे थे, तथा  फ्लैट्स के नाम पर घटिया क्वालिटी का कंस्ट्रक्शन दिया जा रहा था, जिसे नियंत्रित करने के लिए यह एक्ट लागू किया गया है | रेरा कानून क्या है, नियम क्या है और इसमें शिकायत कैसे करें ? इसके बारे में आपको इस पेज पर विस्तार से बता रहे है |

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 क्या है रेरा कानून

रेरा का पूरा नाम रियल एस्टेट विनियमन और विकास अधिनियम है | यह वर्ष 2016 में भारत की संसद का एक अधिनियम है, यह अधिनियम घर खरीदारों के हितों की रक्षा और अचल संपत्ति उद्योग में अच्छे निवेश को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है । बिल राज्यसभा द्वारा 10 मार्च 2016 को और लोकसभा में 15 मार्च 2016 को पारित कर दिया गया था । इसमें कुल 92 धाराएं बनाई गई हैं । 1 मई 2016 को 69 अधिसूचित वर्गों के साथ यह अधिनियम अस्तित्व में आया था ।

इस अधिनियम को बिल्डर्स, प्रमोटर्स और रियल एस्टेट एजेंटों के विरुद्ध शिकायतों में वृद्धि को देखते हुए बनाया गया है। इन शिकायतों में मुख्य रूप से खरीदार के लिए घर कब्जे में देरी, समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद भी प्रमोटरों का गैर जिम्मेदारी  व्यवहार और अनेक प्रकार की समस्याए है । इसके अंतर्गत एक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा । इसका उद्देश्य खरीदारों के हितों की रक्षा के साथ ही प्रमोटरों और रियल एस्टेट एजेंटों के लिए एक पथ निर्धारित करना है ।

अधिनियम के मुख्य प्रावधान

  • राज्य स्तर पर रियल एस्टेट नियामक आयोग या प्राधिकरण का गठन करना होगा । इसका काम प्रदेश में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन करना होगा । डेवलपर्स और खरीदारों के बीच विवादों का निराकरण और समय पर प्रोजेक्ट पूरे होने की निगरानी करना होगा
  • त्वरित न्यायाधिकरणों द्वारा विवादों का समाधान 60 दिन के अन्दर करनें का प्राविधान
  • पांच हजार वर्गफीट या आठ अपार्टमेंट तक की निर्माण योजनाओं को छोडक़र सभी निर्माण योजनाओं को रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण में पंजीकरण कराना अनिवार्य है
  • ग्राहकों से ली गई 70% राशि को अलग बैंक में रखने एवं उसका केवल निर्माण कार्य में प्रयोग का प्रावधान
  • परियोजना संबंधी जानकारी, जैसे ले-आउट, स्वीकृति, ठेकेदार एवं प्रोजेक्ट की मियाद का विवरण खरीदार को अनिवार्यत: देने का प्रावधान

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ऐसे कराये रजिस्ट्रेशन

इसमें रजिस्ट्रेशन हेतु ऑनलाइन आवेदन करना होता है । आवेदन के साथ प्रोजेक्ट की वैधता प्रमाणित करने वाले दस्तावेज, कंपनी का रजिस्ट्रेशन, पेन कार्ड, फोटो, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, फीस चार्ट, इंजीनियर का प्रमाण-पत्र,प्रमोटर्स का आधार कार्ड, टीएंडसीपी व प्रशासन की अनुमतियों सहित 18 दस्तावेज सम्मिलित करनें होते है ।

शिकायत प्रक्रिया 

रियल एस्टेट रेग्युलेशन एक्ट 2016 के सेक्शन 31 के अंतर्गत रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी या निर्णायक अधिकारी के पास शिकायत दर्ज करा सकते है । इनमें  मुख्य रूप से प्रमोटरों, आवंटियों या रियल एस्टेट एजेंटों के विरुद्ध शिकायत कर सकते है  । अधिकांश राज्यों के नियमों में RERA को अपरिवर्तनीय बनाया गया है |

इसमें शिकायत करनें हेतु जिसमें फॉर्म और प्रक्रिया है, रेरा के अंतर्गत पंजीकृत प्रोजेक्ट में यदि नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो निर्धारित समय सीमा के अन्दर उनके विरुद्ध  शिकायत दर्ज करा सकते है । रेरा के अंतर्गत निर्णायक अधिकारी के समक्ष  मुआवजे की शुरुआती सुनवाई होने से पूर्व शिकायतकर्ता को एप्लिकेशन फाइल करनी होती है, आवेदन निर्धारित प्रारूप में होना चाहिए, साथ ही इसमें वह सभी विवरण होने चाहिए जो रेरा प्राधिकरण चाहता है ।

रियल स्टेट कानून में शिकायत दर्ज कराने के लिए कोई समयावधि निर्धारित नहीं है, रेरा के नियमों के अंतर्गत शिकायतकर्ताओं को सीमा अधिनियम, 1963 में निर्धारित कार्यवाही की शुरुआत के लिए समय अवधि का पालन करना पड़ेगा । इस कानून के अंतर्गत समयावधि दावों पर निर्भर करेगी, तत्काल अंतरिम राहत प्राप्त करनें हेतु शिकायत के कारण होने वाली कार्रवाई के बाद RERA अथॉरिटी से शिकायत की जा सकती है ।

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यहाँ पर हमनें आपको रेरा (RERA) कानून (ACT) के बारे में बताया, यदि इस जानकारी से सम्बन्धित आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्न आ रहा है, अथवा इससे सम्बंधित अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो कमेंट बाक्स के माध्यम से पूँछ सकते है,  हम आपके द्वारा की गयी प्रतिक्रिया और सुझावों का इंतजार कर रहे है |

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