वायदा कमोडिटी बाजार क्या है

वायदा कमोडिटी बाजार 

वर्तमान समय में वायदा बाजार (कमोडिटी मार्केट) अधिकंश लोगो को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है, क्योंकि घर बैठे कारोबार करने और लाभ प्राप्त करनें का यह एक अच्छा तरीका है । कई अर्थों में एक नया प्रचलन (ट्रेंड) है, जो अब काफी विकसित हो चुका है । वायदा बाजार में एक निश्चित तिथि पर सौदे के सेटलमेंट किेए जाते हैं । वायदा बाजार में सौदे मुख्य रूप से एक महीने में सेटल हो जाते हैं । वायदा बाजार में कीमतें, मांग और सप्लाई के नियम से निर्धारित होते हैं । वायदा कमोडिटी बाजार क्या है ? इससे सम्बंधित जानकारी आपको इस पेज पर विस्तार से दे रहे है |

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वायदा कमोडिटी बाजार

कमोडिटीज ट्रेडिंग की शुरुआत वर्ष 1875 में बाम्बे कॉटन ट्रेड एसोशिएशन लिमिटेड के साथ हुई थी, और इसी का अनुसरण करते हुए 1900 में गुजराती व्‍यापारी मंडली का भी गठन हुआ था | कमोडिटी बाजार में मुख्‍य रूप से रॉ मटेरियल्‍स (कच्‍चा माल) का आदान-प्रदान होता है । उपयोग में लाई जाने वाली प्रत्येक वस्‍तु कमोडिटी के अंतर्गत आती है । कमोडिटी वह मंच है, जहाँ पर पुराने व वर्तमान मूल्यों के आधार पर या इन भावों का विश्लेषण कर भविष्‍य के सौदे निर्धारित किए जाते हैं । कमोडिटी बाजार में उत्‍पाद की गुणवत्‍ता पर ध्‍यान नहीं दिया जाता बल्कि माँग की आपूर्ति अधिक महत्‍वपूर्ण होती है। इस बाजार में क्‍वालिटी महत्‍व नहीं रखती है । वायदा बाजार फ्यूचर और ऑप्शन दो प्रकार से होता है ।

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1.फ्यूचर (Future) क्या है

कम पैसे में बाजार में ट्रेडिंग फ्यूचर के माध्यम से संभव है । मार्जिन मनी जमा करने पर ही ट्रेडिंग की जा सकती है, और मार्जिन एक्सचेंज द्वारा निर्धारित किया जाता है । फ्यूचर ट्रेडिंग एक माह के लिए होती है । फ्यूचर ट्रेड में प्रत्येक दिन का लाभ- हानि का हिसाब किताब होता है । हानि होने पर ब्रोकर की भरपाई ट्रेडर को करनी पड़ती है । फ्यूचर कारोबार इंडेक्स या स्टॉक्स में होता है । फ्यूचर कैश मार्केट की अपेक्षा प्रीमियम पर ट्रेड करते हैं । फ्यूचर अनुभवी ट्रेडर्स का कार्य है ।

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2.ऑप्शन (Option) क्या है

ऑप्शन में ट्रेडर्स के पास ट्रेडिंग के कुछ विकल्प होते हैं । ऑप्शन ट्रेडिंग की एक सीरीज एक माह की होती है। ऑप्शन में शेयर,उनकी संख्या, प्राइस पहले से निर्धारित हो जाती है,  परन्तु ट्रेडिंग का समय निर्धारित नहीं होता है । ऑप्शन में ट्रेडिंग एक माह में कभी भी हो सकती है । ऑप्शन 2 तरह के होते हैं – बायर ऑप्शन और सेलर ऑप्शन । ऑप्शन बायर के पास कई राइट्स होते हैं, जबकि इन राइट्स के बदले प्रीमियम मिलता है । ऑप्शन बायर को इन राइट्स के लिए धन देना पड़ता है । साल में ऑप्शन ट्रेडिंग की 12 सीरीज होती हैं, अधिकांशतः  9-10 सीरीज में फायदा ऑप्शन सेलर को ही होता है ।

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ऑप्शन में ट्रेडिंग (Option in Trading)

ऑप्शन में ट्रेडिंग कॉल ऑप्शन और पुट ऑप्शन दो प्रकार से होता है । ऑप्शन में बायर अर्थात क्रेता और विक्रेता होते हैं । बायर राइट्स खरीदता है, सेलर राइट्स बेचता है, बदले में सेलर को प्रीमियम दिया जाता है । ऑप्शन में ट्रेडिंग प्रीमियम की होती है । खरीदने का राइट को कॉल ऑप्शन कहते हैं। विक्रय के राइट मांगने को पुट ऑप्शन कहा जाता है। ऑप्शन में सौदे प्रीमियम के लिए होते हैं । ऑप्शन में अलग-अलग स्ट्राइक प्राइस होती है ।

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कारोबार क्या है

वायदा कारोबार में व्यापारी अपनी भविष्य की अवश्यकताओ को ध्यान में रखकर सौदे करता है, इसमें पूरा पैसा भी एक साथ नहीं दिया जाता है, परन्तु निर्धारित तिथि आने तक आपको अपना सौदा क्लियर करना होता है । भारत में कई कमोडिटी एक्सचेंज हैं, जिनमें कमोडिटी का वायदा कारोबार होता है । इनमें एमसीएक्स, एनसीडीएक्स, एनएमसीई और आरसीएक्स प्रमुख हैं ।

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कमोडिटी एक्सचेंज (Commodity Exchange)

कमोडिटी एक्सचेंज, कमोडिटी कारोबार के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराते हैं । वर्तमान समय में भारत में पांच राष्ट्रीय स्तर के कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स, एनसीडीईएक्स, एसीई, आईसीईएक्स और एनएमसीई हैं । यह सभी एक्सचेंज भारत सरकार द्वारा वायदा बाजार के नियमन के लिए स्थापित वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) के नियंत्रण में कार्य करते हैं । इसके अतिरिक्त देश में 20 और कमोडिटी एक्सचेंज हैं | देश में कमोडिटी कारोबार के काफी बड़े भाग पर एमसीएक्स और एनसीडीईएक्स का आधिपत्य है ।

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वायदा बाजार में खतरा (Risk)

वायदा बाजार में ट्रेडिंग करनें से पहले रिसर्च करना चाहिए, क्योंकि वायदा बाजार में रिस्क अधिक होता है । ट्रेडिंग से पहले आरडी डॉक्यूमेंट पर हस्ताक्षर करने होते हैं । शॉर्ट सेलिंग में रिस्क अधिक होता है । शॉर्ट सेलिंग ज्यादा अनुभवी लोगों का कार्य  करता है । कैश मार्केट के मुकाबले वायदा कारोबार में रिस्क अधिक होता है । वायदा बाजार में रिस्क अधिक होनें से लाभ भी अधिक होता है । निवेशक ट्रेडिंग की शुरुआत वायदा कारोबार से ना करें, बल्कि कैश मार्केट से करें, क्योंकि हानि होने पर एक्सट्रा मार्जिन देना पड़ सकता है । वायदा कारोबार में ट्रेडर्स के पास लिक्विडिटी होना आवश्यक है, अधिक उतार-चढ़ाव होने पर एक्सचेंज मार्जिन बढ़ा देते हैं ।

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हेजिंग

शेयर मार्केट या कमोडिटी बाजार में निवेश के दौरान जोखिम से बचने के लिए निवेशक हेजिंग का उपयोग करते हैं,  शेयर बाजार में वायदा अनुबंधों के दौरान किसी कंपनी के शेयरों में निवेश किए गए भावों में अचानक गिरावट दर्ज की जाने लगे, तो ऐसी विपरीत परिस्थितियों से बचने के लिए हेजिंग का उपयोग किया जाता है । सामान्य तौर पर हेज का प्रयोग शेयर बाजार में विपरीत परिस्थितियों से बचने के लिए किया जाता है ।

यहाँ पर हमनें आपको वायदा कमोडिटी बाजार के विषय में बताया | यदि इस जानकारी से सम्बन्धित आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्न आ रहा है, अथवा इससे सम्बंधित अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो कमेंट बाक्स के माध्यम से पूँछ सकते है,  हम आपके द्वारा की गयी प्रतिक्रिया और सुझावों का इंतजार कर रहे है |

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