कार्बन उत्सर्जन क्या है?

कार्बन उत्सर्जन के बारें में जानकारी (About Carbon Emission)

नगरीकरण एवं औद्योगीकरण वैज्ञानिक विकास की देन हैं, तथा इन दोनों की देन पर्यावरण प्रदूषण है| विश्व के सभी देशों द्वारा की जा रही औद्योगिक गतिविधियों से विश्व में ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन काफी तेज गति से बढ़ रहा है, जिसके कारण पृथ्वी के तापमान में निरंतर वृद्धि होती जा रही है| तापमान में होनें वाली इस वृद्धि में सबसे अधिक योगदान कार्बन डाई ऑक्साइड गैस का है| जिन देशों औद्योगिक गतिविधियाँ ज्यादा होतीं है, वहां कार्बन का उत्सर्जन अधिक होता है| क्योटो प्रोटोकोल एक ऐसी ही संधि है, जो कि ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए विश्व के विकसित और विकासशील देशों को बाध्य करती है| कार्बन उत्सर्जन क्या है? इसके बारें में आपको इस पेज पर विस्तार से बता रहे है|

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कार्बन उत्सर्जन क्या है?

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कार्बन उत्सर्जन क्या है (What is Carbon Emission)

कार्बन उत्सर्जन व्यापार नीति का एक प्रकार है, जो कंपनियों को कार्बन डाइऑक्साइड आउटपुट के सरकार द्वारा प्रदान किए गए आवंटन को खरीदने या बेचने की अनुमति देता है। किसी एक संस्था, व्यक्ति या उत्पाद द्वारा किये जाने कार्य से कार्बन उत्सर्जन होता है। इसका अर्थ यह है, कि कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन या ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी होता है। किसी व्यक्ति, संस्था या वस्तु के कार्बन फुटप्रिंट का आकलन ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के आधार पर किया जा सकता है। सम्भवतः कार्बन फुटप्रिंट का सबसे बड़ा कारण इंसान की इच्छा ही होती है। इसके साथ घरो में उपयोग होने वाली बिजली की आवश्यकता भी इसका बड़ा कारण है।

दूसरे शब्दों में, हमें प्रत्येक कार्य करनें के लिए ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है, और इससे कार्बन डाइआक्साइड गैस निकलती है, जो धरती को गर्म करने में सबसे अहम भूमिका निभाती है। हम दिन, महीने या साल में जितनी कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न करते हैं, वह हमारा कार्बन फुटप्रिंट है। इसकी वृद्धि में कमी रख कर ही पृथ्वी को जलवायु परिवर्तन के प्रकोप से बचाया जा सकता है।

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ग्रीनहाउस गैसों में कमी लाने के तरीके (Ways to Reduce Greenhouse Gases)

मानव द्वारा किये जा रहे उत्सर्जन के कारण औद्योगिक क्रांति से लेकर अब तक पृथ्वी की सतह का औसत तापमान पहले ही 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी गैसों में होनें वाली निरंतर वृद्धि से हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को और अधिक खतरनाक बना रही है।

हम कई तरीको से ग्रीनहाउस गैसों में कमी कर सकते है, जैसे सौर, पवन ऊर्जा के इस्तेमाल और पौधारोपण आदि से कार्बन उत्सर्जन में कमी की जा सकती है। कार्बन उत्सर्जन और अन्य ग्रीनहाउस गैसों का वातावरण में ईंधन, कच्चे तेल और कोयले के जलने से होता है। घर में बिजली के अधिक प्रयोग से और फ्लोरेसेंट बल्बों के इस्तेमाल से कमीं की जा सकती है। ग्लास, धातुओं, प्लास्टिक और कागज को एक से अधिक बार उपयोग में लाएँ, इसके साथ ही निरंतर चलनें वाले रेफ्रिजरेटर की स्पीड धीमी रखें। घर की दीवारों पर हल्के रंग का पेंट भी इसमें काफी मददगार होता है।

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  • घरो में रौशनी के लिए सीएफएल बल्बों का प्रयोग करें, क्योंकि सीएफएल के इस्तेमाल से वर्ष में लगभग 70 किलो कार्बन डाइऑक्साइड बचाया जा सकता है।
  • इंडिकेटर और स्टैंडबाय मोड पर रहनें वाले गैजेट्स कई किलो कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न करते हैं।
  • उचित मात्रा में कपड़े एकत्र होनें पर ही वाशिंग मशीन का उपयोग करे |
  • गाड़ी के टायरों में हवा सही रखकर लगभग तीन प्रतिशत ईंधन की बचत कर सकते हैं।
  • अधिक से अधिक वृक्ष लगानें का प्रयास करे, क्योंकि एक अकेला वृक्ष अपनी जिन्दगी में एक टन कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है।
  • भोजन को बर्बाद करनें से बचे, क्योंकि इसे तैयार करने में काफी ऊर्जा का उपयोग होता है।

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उत्सर्जन का कारण प्रतिशत
बिजली और हीटिंग24.6
भू-उपयोग में परिवर्तन18.2
कृषि कार्य13.5
परिवहन13.5
उद्योगो द्वारा10.4

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सर्वाधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाले देशों की सूची (Highest Carbon Emissions Countries)

यूरोपीय आयोग और नीदरलैंड पर्यावरण आकलन एजेंसी द्वारा जारी किए गए “एडगर डेटाबेस” के अनुसार, चीन एक ऐसा देश है, जो विश्व में सबसे अधिक कार्बन डाइऑक्साइड गैस का उत्सर्जन करता है, जबकि अमेरिका प्रति व्यक्ति के अनुसार सब्स्र अधिक  कार्बन डाइऑक्साइड गैस का उत्सर्जन करने वाला देश है| दुनिया के 10 सबसे बड़े कार्बन डाइऑक्साइड उत्पादक देशों का कुल कार्बन डाइऑक्साइड गैस के उत्पादन में 67.6% का योगदान है, जिसमें चीन का अकेले योगदान लगभग 30% है|

कार्बन डाई ऑक्साइड का बढ़ता हुआ स्तर पूरे विश्व के लिए भी चिंता का विषय हैं, जिसमें भारत भी शामिल है| हालांकि कार्बन डाईऑक्साइड के बढ़ते स्तर से भारत पर क्या प्रभाव होगा, इसका कोई आकलन नहीं है। सेंटर फॉर साइंस द्वारा किये गये अध्ययन के अनुसार 20 वीं सदी की शुरुआत के बाद से भारत के वार्षिक औसत तापमान में लगभग 1.2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो चुकी है । जिसके परिणामस्वरूप मौसम की घटनाओं जैसे बेमौसम बारिश, बाढ़, सूखा  और उसमें आ रही अनिमियतता और ओलावृष्टि में हो रही वृद्धि साफ़ देखी जा सकती है|

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क्र०सं० देश का नाम प्रति वर्ष कार्बन उत्सर्जन
1.चीन10,641 मिलियन मीट्रिक टन
2.संयुक्त राज्य अमेरिका5,414 मिलियन मीट्रिक टन
3.भारत2,274 मिलियन मीट्रिक टन
4.रूसी संघ1,617 मिलियन मीट्रिक टन
5.जापान1,237 मिलियन मीट्रिक टन
6.जर्मनी798 मिलियन मीट्रिक टन
7.ईरान648 मिलियन मीट्रिक टन
8.सऊदी अरब601 मिलियन मीट्रिक टन
9.दक्षिण कोरिया592 मिलियन मीट्रिक टन
10.कनाडा557 मिलियन मीट्रिक टन

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यहाँ पर हमनें आपको कार्बन उत्सर्जन के विषय में बताया| यदि इस जानकारी से सम्बन्धित आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्न आ रहा है, अथवा इससे सम्बंधित अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो कमेंट बाक्स के माध्यम से पूँछ सकते है,  हम आपके द्वारा की गयी प्रतिक्रिया और सुझावों का इंतजार कर रहे है |

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