भारतीय नौसेना दिवस कब और क्यों मनाया जाता है

भारतीय नौसेना दिवस ( Indian Navy Day) 

भारतीय नौसेना का इतिहास बहादुरी के कारनामों से भरा हुआ है। नौसेना भारतीय सेना का सामुद्रिक अंग है, जिसकी स्थापना 1612 में हुई थी। ईस्ट इंडिया कंपनी नें अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी मैरिन के रूप में सेना गठित की थी, जिसे बाद में रॉयल इंडियन नौसेना नाम दिया गया। 1947 में भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 1950 में नौसेना का पुनः गठन हुआ और इसे भारतीय नौसेना नाम दिया गया। विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी इस नौसेना ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर भारी बमबारी कर उसे तबाह कर दिया था। भारतीय नौसेना दिवस के इतिहास और महत्व के बारें में आपको इस पेज पर विस्तार से बता रहे है|

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भारतीय नौसेना दिवस का इतिहास ( History Of Indian Navy Day)

प्रतिवर्ष 4 दिसंबर का दिन देश में भारतीय नौसेना दिवस ( Indian Navy Day) के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नौसेना के जाबाजों को याद किया जाता है। वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय नौसेना की जीत के जश्न के रूप में भारतीय नौसेना दिवस मनाया जाता है। पाकिस्तानी सेना ने 3 दिसंबर 1971 को हमारे हवाई क्षेत्र और सीमावर्ती क्षेत्र में हमला बोल दिया था। जवाबी कार्रवाई में भारत ने  ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ चलाया था। इसी के साथ 1971 के युद्ध की भी शुरुआत हुई थी। तब भारत ने पाकिस्तानी नौसेना के कराची स्थित मुख्यालय को निशाना बनाया था। यह हमला इतना जबरदस्त था कि कराची बंदरगाह पूरी तरह बर्बाद हो गया था और इससे लगी आग सात दिनों तक जलती रही थी। भारत के इस हमले ने पाकिस्तानी सेना की कमर तोड़ दी थी। इस युद्ध में सफलता प्राप्त करने वाली भारतीय नौसेना की ताकत और बहादुरी को याद करते हुए प्रति वर्ष 4 दिसंबर को भारतीय नौसेना दिवस मनाया जाता है।

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भारतीय नौसेना से सम्बंधित जानकारी (About Indian Navy)

  • भारतीय नौसेना भारतीय सेना का सामुद्रिक अंग है| भारतीय नौसेना की अधिकृत शुरुआत 05 सितंबर 1612 को हुई थी| आधुनिक भारतीय नौसेना की नींव 17वीं शताब्दी में रखी गई थी|
  • भारतीय नौसेना का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है| यह मुख्य नौसेना अधिकारी- एडमिरल के नियंत्रण में होता है| भारतीय नौसेना के पास लगभग 67,000 कर्मचारी और लगभग 295 नौसेना हथियार हैं|
  • भारतीय नौसेना तीन क्षेत्रों की कमांडों के तहत तैनात की गई है, इसमें से प्रत्येक का नियंत्रण एक फ्लैग अधिकारी द्वारा किया जाता है|
  • भारत का पहला विमानवाही पोत आई.एन.एस.’विक्रांत’ था| इसे साल 1961 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था| इस विमानवाही पोत को जनवरी 1997 में सेवामुक्त कर दिया गया था|
  • भारतीय नौसेना भिन्न-भिन्न देशों की बंदरगाहों के दौरे का आयोजन करती है| भारतीय नौसेना देश में किसी प्रकार की आपदा की स्थिति में सहायता का हाथ बढ़ाती है| दक्षिण एशिया में भारतीय नौसेना को सबसे मजबूत बल माना जाता है|

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नौसेना के तीन क्षेत्रीय कमांड (Indian Navy Regional Command)

  • ईस्टर्न नेवल कमांड (विशाखापट्टनम)
  • वेस्टर्न नेवल कमांड (मुंबई)
  • साउदर्न नेवल कमांड (कोच्चि)

आजादी में नौसेना की अहम भूमिका  (Navy’s Important Role In Independence)

नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिन्द फौज द्वारा छेड़े गए सशस्त्र संघर्ष से प्रेरित होकर रॉयल इंडियन नेवी के भारतीय सदस्यों ने 18 फरवरी 1946 को एचआईएमएस तलवार नाम के जहाज से जंग-ए-आजादी का ऐलान कर दिया था। नौसैनिकों का यह विद्रोह इतना तीव्र था कि जल्द ही यह 78 जहाजों और 20 तटों तक फैल गया था तथा इसमें 20 हजार नाविक शामिल हो गए थे। उन्होंने लाउडस्पीकरों से आजादी के तराने गाए और कई जगह गोरे नौसैनिकों के साथ उनकी हिंसक मुठभेड़ हुई। हालांकि भारतीय नेताओं का समर्थन न मिलने के कारण नौसैनिकों का यह विद्रोह सफल नहीं हो पाया, परन्तु अंग्रेजों के दिलों में यह डर जरूर बैठ गया कि अब उनकी भारत से भागने में ही भलाई है।

भारतीय नौसेना के मार्कोस कमांडो दुनिया के बेहतरीन कमांडो में शामिल हैं| जिन्होंने मुंबई में होटल ताज में घुसे आतंकवादियों को मौत के आगोश तक पहुंचाने के लिए एनएसजी कमांडो के साथ मिलकर अहम भूमिका निभाई थी। मार्कोस कमांडो ने 1988 में भारतीय जलक्षेत्र में अपहृत जहाज में मालदीव के तत्कालीन शिक्षामंत्री सहित बहुत से बंधकों की जान बचाकर ऑपरेशन कैक्टस को बखूबी सफलता के अंजाम तक पहुंचाया था। मार्कोस जम्मू-कश्मीर की झेलम नदी और वुलर में भी जलमार्ग से आतंकवादियों की घुसपैठ को विफल करते रहे हैं।

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भारतीय नौसेना के महत्वपूर्ण अभियान (Important Operations of Indian Navy)

  • 1961 ऑपरेशन विजय
  • पुर्तगालियों से गोवा मुक्ति अभियान में पहली बार नौसेना का इस्तेमाल
  • 1971 ऑपरेशन ट्राइडेंट (भारत पाकिस्तान युद्ध)
  • 1988 ऑपरेशन कैक्टस (वायुसेना के साथ मिलकर मालदीव संकट का समाधान)
  • 1999 ऑपरेशन तलवार (कारगिल युद्ध के दौरान सहयोग)
  • 2004 सुनामी संकट (हिंद महासागर में सुनामी से मची तबाही में आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु केअलावा इंडोनेशिया, श्रीलंका, मालदीव के राहत एंव पुनर्वास कार्यक्रम में सहयोग)
  • 2006 ऑपरेशन सुकून (इज़रायल-लेबनान संघर्ष के दौरान लेबनान में फसे भारतीय, श्रीलंकाऔर नेपाल के नागरिकों को निकालने में सहायता)
  • 2011 ऑपरेशन सेफ होमकमिंग (युद्धग्रस्त लीबिया से भारतीयों को बचाने में अहम भूमिकानिभाई) 2015 ऑपरेशन राहत (यमन संकट के दौरान वहां फसे 3,074 नागरिकों को बचाने मेंअहम भूमिका)
  • 2018 ऑपरेशन निस्तर (चक्रवात के कारण यमन के सोकोद्रा द्वीप पर फसे 38 भारतीयोंको सुरक्षित निकाला गया)

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