तीन तलाक कानून क्या है?

तीन तलाक (Teen Talaq) कानून के विषय में जानकारी

भारतीय मुस्लिम सभ्यता में तीन तलाक एक काला धब्बा था | जिसके कारण लाखों मुस्लिम महिलाओं के जीवन से खिलवाड़ किया जाता है | मुस्लिम महिलाओं के प्रयासों और केंद्र सरकार की इच्छा शक्ति के कारण भारत में तीन तलाक को गैर कानूनी माना गया है | सर्वोच्च न्यायालय ने इसे कुछ समय पहले ही अवैध घोषित कर दिया था और इसके लिए कानून बनाने का निर्देश केंद्र सरकार को दिया था | अभी हाल ही में दोनों सदनों के द्वारा इसे पास कर दिया गया है | इस पेज पर तीन तलाक कानून क्या है, बिल के प्रावधान, पक्ष और विपक्ष में वोट के विषय में बताया जा रहा है |

ये भी पढ़ें: हलाला (निकाह हलाला) क्या होता है?

ये भी पढ़ें: शिया और सुन्नी मुसलमानों में क्या अंतर है?

तीन तलाक क्या है (What is Teen Talaq)?

मुस्लिम सभ्यता में पुरुष अपनी पत्नी को किसी भी समय तीन बार तलाक- तलाक- तलाक बोल कर अपनी शादी को समाप्त करने की घोषणा कर सकता है | तलाक के बाद मुस्लिम महिला का पति दूसरी शादी कर सकता है और महिला भी दूसरी शादी कर सकती है | मुस्लिम समाज में तलाक देने का अधिकार केवल पुरुषों को ही दिया गया था | जिससे मुस्लिम महिला वर्ग हमेशा भय के साथ अपना जीवन व्यतीत करती थी | तलाक के अधिकार के कारण मुस्लिम पुरुष वर्ग के द्वारा मुस्लिम महिला वर्ग को प्रताड़ित किया जाता था |

ये भी पढ़ें: मॉब Lynching क्या है?

तीन तलाक कानून क्या है (What is Divorce Laws)?

मुस्लिम समाज की महिलाओं को इस तीन तलाक की कुप्रथा से छुटकारा देने के लिए भारत सरकार ने इसे गैर कानूनी माना है, जिसके तहत कुछ नियम बनाये गए है, इन्हीं नियमों को तीन तलाक कानून कहा जाता है |

तीन तलाक बिल के प्रावधान (Provision)

तीन तलाक बिल के प्रावधान इस प्रकार है-

  • भारतीय मुस्लिम पति यदि एक बार में अपनी पत्नी को मौखिक, लिखित या किसी अन्य माध्यम से तीन तलाक देता है, तो इसे अपराध माना गया है |
  • तीन तलाक देने पर स्वयं पत्नी या उसका नजदीकी रिश्तेदार इसके लिए न्यायालय में मुकदमा दर्ज करा सकता है |
  • तीन तलाक को महिला अधिकार संरक्षण कानून 2019 के तहत लाया गया है | शिकायत होने पर पुलिस बिना वारंट के तीन तलाक देने वाले आरोपी पति को गिरफ्तार कर सकती है |
  • एक साथ तीन तलाक देने पर पति को तीन साल तक कैद और जुर्माना दोनों का प्रावधान किया गया | इसमें जमानत मजिस्ट्रेट कोर्ट के द्वारा दी जा सकती है |
  • पीड़ित महिला का पक्ष सुने बिना मजिस्ट्रेट तीन तलाक देने वाले पति को जमानत नहीं दे सकते है |
  • तीन तलाक पर पत्नी और बच्चे के भरण पोषण का खर्च मजिस्ट्रेट के द्वारा निर्धारित किया जायेगा जिसके बाद उस पति को वह धनराशि अपनी पत्नी और बच्चों को देना होगा |
  • बच्चे छोटे होने पर उन्हें माँ के पास रखने का अधिकार दिया गया |
  • तीन तलाक पर समझौते का विकल्प रखा गया है, लेकिन यह समझौता पत्नी की सहमति पर ही किया जा सकता है, मजिस्ट्रेट उचित शर्तों के साथ इस समझौता को अपनी स्वीकृति प्रदान करेंगे | इस समझौते में महिला के अधिकारों की रक्षा की जाएगी |

ये भी पढ़ें: ईद (Id) क्यों मनाई जाती है?

पक्ष और विपक्ष में वोट

लोकसभा में तीन तलाक बिल के पक्ष में 303 वोट पड़े और विरोध में 82 वोट पड़े थे | जिसके बाद राज्य सभा में इस बिल के पक्ष में 99 वोट पड़े और इसके विरोध में 84 वोट पड़े | राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह लागू होगा |

ये भी पढ़ें: आर्टिकल 15 (Article 15) क्या है?

ये भी पढ़ें: Minority (अल्पसंख़्यक) क्या है?

ये भी पढ़ें: बेल (Bail) या जमानत क्या होती है ?

 ये भी पढ़ें: डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Signature) किसे कहते है?

ये भी पढ़ें: वर्ल्ड ब्लड डोनर डे (World Blood Donor Day) कब मनाया जाता है