व्यवहारवाद क्या है (Pragmastism Kya hai)

व्यवहारवाद और उत्तर व्यवहारवाद (Pragmatism And Remedialism)

अभी तक दो विश्व युद्ध हो चुके है, जिसमे सम्पूर्ण विश्व दो गुटों में विभाजित हो गया था | प्रत्येक गुट अपनी- अपनी शक्तियों का प्रयोग विपक्षी गुट के देश पर करके बहुत ही बड़ी संख्या में नरसंहार कर रहे थे | इन दोनों युद्धों के पूर्व राजनीति शास्त्र का अध्ययन परम्परावादी दृष्टिकोण से किया जाता था | यह दृष्टिकोण अत्यंत कठोर था,  जिससे तत्कालीन राजनीतिक विश्लेषकों में वैचारिक असंतोष का जन्म हुआ | इस असंतोष ने व्यवहारवादी आन्दोलन का रूप ले लिया | व्यवहारवादी आन्दोलन में मानवीय व्यवहार को राज्य से ऊपर मान कर स्वतन्त्र रूप से अध्ययन का केन्द्र बिन्दु बनाया | व्यवहारवाद क्या है ? इससे सम्बंधित जानकारी आपको इस पेज पर विस्तार से दे रहे है |

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व्यवहार का अर्थ (Meaning Of  Pragmatism)

द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात राजनीतिक शास्त्रियों ने राजनीति-शास्त्र को कल्पनाओं के भंवरजाल से बाहर निकालकर उसे अनुभववादी तथा क्रियात्मक बनाने के जो प्रयास किए है, इन सभी प्रयासों को व्यवहारवादी आन्दोलन के नाम से जाना जाता है | इसे दूसरे शब्दों में इस प्रकार से समझा जा सकता है, व्यवहारवाद वह है जिसमे राजनीतिक अध्ययन को आधुनिक मनोविज्ञान, समाज शास्त्र और अर्थशास्त्र में विकसित सिद्धान्तों, पद्धतियों तथा खोजों व दृष्टिकोणों  के अनुरूप और वैज्ञानिकता के आधार पर मानवीय तत्वों और अनुभव को अधिक महत्व दिया गया है |

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व्यवहारवाद के उपागम या सिद्धांत (Principal Of Pragmastism)

व्यवहारवाद के प्रतिपादक जे.बी. वाटसन है | यह उस समय हॉकिन्स यूनिवर्सिटी में कार्यरत थे | जे.बी. वाटसन ने व्यवहारवाद को दो श्रेणियों में विभाजित किया है |

  • प्राथमिक उपक्रम
  • गौण उपक्रम

प्राथमिक उपक्रम को इन्होने धनात्मक और गौण उपक्रम को ऋणात्मक की संज्ञा दी है |

प्राथमिक उपक्रम (Primary Undertaking)

प्राथमिक उपक्रम के अंतर्गत इन्होने वस्तुनिष्ठ मनोविज्ञान, प्रेक्षण और अनुबंधन महत्व, आनुभाविक / वर्गीकृत व्यवहारवाद को रखा है

गौण उपक्रम (Accessory Venture)

गौण उपक्रम के अंतर्गत चेतना व संरचनावाद / प्रकार्यवाद को नकार दिया गया है, तात्विक/ आमूल व्यवहारवाद | इन्होने आनुभाविक / वर्गीकृत व्यवहारवाद को अधिक महत्व दिया है न कि चेतना को |

जे.बी. वाटसन ने आदत को बदलने के दो नियम बताये है, जो इस प्रकार है –

  • बारम्बारता के नियम
  • अभिनवता के नियम

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महत्त्वपूर्ण राजनीतिक सिद्धान्त (Important Political Principle)

  • क्लासिकी राजनीतिक सिद्धान्त
  • उदारवादी राजनीतिक सिद्धान्त
  • मार्क्सवादी राजनीतिक सिद्धान्त
  • आनुभविक वैज्ञानिक राजनीतिक सिद्धान्त
  • समकालीन राजनीतिक सिद्धांन्त

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उत्तर-व्यवहारवाद का अर्थ (Meaning Of Remedialism)

डेविड ईस्टन ने उत्तर-व्यवहारवाद को इस प्रकार परिभाषित किया है उन्होंने कहा है कि ‘‘यह एक वास्तविक क्रान्ति है, न कि प्रतिक्रिया, विकास है, न कि अनुरक्षण, आगे की दिशा में एक कदम है न कि पीछे हटने की प्रवृत्ति। यह आन्दोलन भी है और एक बौद्धिक प्रवृत्ति भी।’’ उन्होंने आगे कहा है कि ’’उत्तर व्यवहारवादी क्रान्ति न तो राजनीति शोध को किसी स्वर्ण युग की ओर लौटने का प्रयास है और न ही इसका मन्तव्य किसी पद्धतीय दृष्टिकोण विशेष का विनाश करना है | यह एक ऐसा सकारात्मक आन्दोलन है जो प्रति सुधारों की अपेक्षा सुधारों पर जोर देता है ” |

इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि उत्तर-व्यवहारवाद एक ऐसा आन्दोलन है जो व्यक्ति समूह और बौद्धिक प्रवृत्ति दोनों का प्रतिनिधित्व करता है, इस आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य परम्परावादी या व्यवहारवादी किसी भी दृष्टिकोण का खण्डन करना नहीं है यह तो समकालीन राजनीतिक अनुसंधान के प्रति असन्तोष की भावना को व्यक्त करने का एक माध्यम है |

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व्यवहारवाद और उत्तर-व्यवहारवाद का मूल्यांकन (Evaluation)

व्यवहारवाद की विचार धारा जन्म लेने के बाद राजनीति शास्त्र के क्षेत्र क्रान्तिकारी परिवर्तन हुए और इस क्षेत्र को आधुनिकता प्राप्त हुई | व्यवहारवाद के आने के बाद परम्परागत राजनीतिक सिद्धान्तों से राजनीति-शास्त्र को अलग कर दिया गया | वैज्ञानिक अनुभव के द्वारा राजनीति शास्त्र को नए दृष्टिकोण, पद्धतियां व नवीन क्षेत्र प्राप्त हुए | इस प्रकार राजनीतिक अध्ययन को एक नयी दिशा प्राप्त हो सकी | व्यवहारवाद के कारण ही व्यवहारवाद आधुनिक मनोविज्ञान, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र के सिद्धान्तों, पद्धतियों, उपलब्धियों तथा दृष्टिकोणों पर खरा उतर सका है |

राजनीति विज्ञान में व्यवहारवाद ने व्यापक प्रभाव डाला है, जिससे वैज्ञानिक विधियां व मूल्य निरपेक्ष दृष्टिकोण देकर उसके स्वरूप व विषय वस्तु को परिवर्तित किया जा रहा है | यह सब होने के बाद भी व्यवहारवाद की क्रांति बहुत ही जल्द असफल होने लगी इसका कारण इसका सीमित उपयोग और इसकी सीमाएं है |

इसके बाद इसका स्थान उत्तर-व्यवहारवाद ने लिया है, उत्तर-व्यवहारवाद के द्वारा व्यवहारवाद के समस्त दोषों को दूर करने का प्रयास किया गया | इसमें समाज की वास्तविक समस्याओं पर अधिक ध्यान दिया गया | उत्तर-व्यवहारवाद ने व्यवहारवाद को काल्पनिक दुनिया में लोप होने से बचाया है | इसने राजनीतिक विज्ञान की प्रासांगिकता और क्रियानिष्ठा (Relevance and Action) पर अधिक बल दिया है |

उत्तर-व्यवहारवाद ने एक ऐसा व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया जिससे आपसी मतभेदों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है | इसके द्वारा राजनीतिक चिन्तन, विश्लेषण व अध्ययन में समन्वय स्थापित करने का पूरा सफल प्रयास किया गया है | इसके द्वारा न तो परम्परावादी राजनीतिक सिद्धान्त का खण्डन किया और न हीं व्यवहारवाद के सिद्धांतों का | उत्तर-व्यवहारवाद ने व्यवहारवाद को एक नयी दिशा प्रदान की है |

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