छठ पूजा कब है

छठ पूजा कैसे मनाया जाता है

छठ पूजा उत्तर भारत का प्रमुख हिन्दू त्यौहार है, क्षेत्र के अनुसार बिहार में इस पर्व को विशेष महत्व है | इस पूजा में मुख्य रूप से सूर्यदेव की उपासना की जाती है, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार छठ को सूर्य देवता की बहन के रूप में मान्यता प्राप्त है, छठ के पर्व पर सूर्योपासना करने से छठ जी अत्यधिक प्रसन्न होती हैं, जिससे घर में सुख शांति व धन की कमी नहीं होती है | इस पेज पर छठ पूजा को मनाने के विषय में जानकारी प्रदान की जा  रही है |

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छठ पूजा कब है

यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है | हिंदी कैलेण्डर के अनुसार चैत्र शुक्ल षष्ठी व कार्तिक शुक्ल षष्ठी इन दोनो तिथियों को यह पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है | पुराणों के अनुसार कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाये जाने वाली छठ पूजा का विशेष महत्व है | यह पर्व चार दिन तक मनाया जाता है, इसे छठ पूजा, डाला छठ, छठी माई, छठ, छठ माई पूजा, सूर्य षष्ठी पूजा के नाम से जाना जाता है |

कार्तिक छठ पूजा 2019

तारीख दिन पर्व तिथि
31 अक्‍टूबर 2019 गुरुवार नहाय-खाय चतुर्थी
1 नवंबर 2019 शुक्रवार लोहंडा और खरना पंचमी
2 नवंबर 2019 शनिवार संध्या अर्ध्य षष्ठी
3 नवंबर 2019 रविवार उषा अर्घ्य, पारण का दिन सप्तमी

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छठ पूजा का पर्व क्यों मनाया जाता है ?

छठ पूजा सूर्य देव की उपासना की जाती है, जिससे परिवार में सुख-शांति बानी रहे | इसके अतिरिक्त संतान के सुखद भविष्य इस व्रत को धारण किया जाता है | मान्यता है, कि छठ पर्व का व्रत रखने से निसंतानों को संतान की प्राप्ति होती है, इसलिए छठ पूजा का विशेष महत्व है

छठ पूजा विधि

chhath puja vidhi

छठ पूजा विधि इस प्रकार है-

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स्नान और भोजन ग्रहण करना

छठ पूजा व्रत चार दिन तक रखा जाता है, छठ पूजा के पहले ही घर की सफाई अच्छे से कर लेनी चाहिए | इसके प्रथम दिन व्यक्ति को अपने घर और स्वयं को शुद्ध रखना चाहिए | घर में केवल शुद्ध शाकाहारी भोजन ही करना चाहिए |

खरना

इसके द्वितीय दिन खरना की विधि संपन्न की जाती है | खरना की विधि में व्यक्ति को पूरे दिन का उपवास रखना चाहिए | सांयकालीन गन्ने का रस या गुड़ में बने हुए चावल की खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए | इस दिन बनी हुई गुड़ की खीर अत्यधिक पौष्टिक और स्वादिष्ठ रहती है |

सांयकालीन का अर्घ्य

chhath puja ardhya

तृतीय दिन सूर्य षष्ठी को पूरे दिन उपवास रहकर, सांयकालीन सूर्य अस्त होते हुए सूर्य को अर्ध्य दी जाती है | अर्ध्य देने के लिए पूजा की सामग्रियों को नदी के तट पर ले जाया जाता है, वहां पर अर्ध्य  देने के बाद घर वापस आकर पूजा की सामग्री को सुरक्षित रखा जाता है | इसी दिन रात के समय छठी माता के भजन, कीर्तन और व्रत कथा सुननी चाहिए |

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सुबह का अर्ध्य 

यह चौथे दिन होता है, इसके लिए आपको सूर्य निकलने से पहले ही नदी के तट पर पहुंच जाना चाहिए | सूर्य की पहली किरण निकलते ही अर्घ्य देना चाहिए | अर्घ्य देने के बाद छठ माता को प्रणाम करके उनसे संतान की रक्षा करने की प्रार्थना करना चाहिए | घर वापस आने पर घर के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरण करना चाहिए तथा स्वयं भी प्रसाद खाकर व्रत खोलना चाहिए |

यहाँ पर हमनें आपको छठ पूजा के विषय में बताया, यदि इस जानकारी से सम्बन्धित आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्न आ रहा है, अथवा इससे सम्बंधित अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो कमेंट बाक्स के माध्यम से पूँछ सकते है,  हम आपके द्वारा की गयी प्रतिक्रिया और सुझावों का इंतजार कर रहे है |

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