दीपावली लक्ष्मी पूजन मुहूर्त क्या है ?

दीपावली लक्ष्मी पूजन मुहूर्त 2018 

दीपावली के दिन माता लक्ष्मीजी की पूजा होती है, इन्हें धन और सम्रद्धि की देवी कहा जाता है | वर्तमान समय में मनुष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता धन, संपत्ति है | सनातन धर्म के विष्णु पुराण में बताया गया है, कि लक्ष्मी जी भृगु और ख्वाती की पुत्री हैं, लक्ष्मी जी भगवान विष्णु जी की अर्धांगिनी हैं | मान्यता है, कि जिस घर में माता लक्ष्मी का वास होता है, वहां धन, संपत्ती, समृद्धि आती है, इसलिए माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए विधि पूर्वक पूजन किया जाता है | दीपावली लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त का समय क्या है ? इसके विषय में जानकारी दी जा रही है |

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लक्ष्मी पूजन मुहूर्त समय 

diwali puja

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 05:57 से 07:53 सांयकालीन
प्रदोष काल 05:27 से 08:06 सांयकालीन
वृषभ काल 05:57 से 07:53 सांयकालीन
अमावस्या तिथि आरंभ 10:27 (06 नवंबर) सांयकालीन
अमावस्या तिथि समाप्त 09:31 (07 नवंबर) सांयकालीन

सामग्री

दिवाली पूजा के लिए रोली, चावल, पान-सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, घी या तेल से भरे हुए दीपक, कलावा, नारियल, गंगाजल, फल, फूल, मिठाई, दूर्वा, चंदन, घी, मेवे, खील, बताशे, चौकी, कलश, फूलों की माला, शंख, लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, थाली, चांदी का सिक्का, 11 दिए आदि वस्तुएं पूजा के लिए एकत्र कर लेना चाहिए |

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समय

लक्ष्मी पूजा को प्रदोष काल के दौरान किया जाना चाहिए जो कि सूर्यास्त के बाद प्रारम्भ होता है और लगभग 2 घण्टे 24 मिनट तक रहता है | सामान्य लोगों के लिए हम प्रदोष काल मुहूर्त उपयुक्त बताते हैं |

पूजा की विधि

पूजा की विधि इस प्रकार से है-

पवित्रीकरण

पूजा के लिए जलपात्र से थोड़ा सा जल हाथ में लेकर मूर्तियों के ऊपर छिड़कें, इसके साथ ही मंत्र पढ़ें | इसके साथ ही आप पूजा की सामग्री को और अपने आसन को भी पवित्र कर लें |

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ॐ पवित्रः अपवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा |

यः स्मरेत्‌ पुण्डरीकाक्षं स वाह्यभ्यन्तर शुचिः॥

पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग षिः सुतलं छन्दः

कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥

आपने पृथ्वी पर जिस जगह आसन बिछाया उसको पवित्र करते हुए, पृथ्वी माता को प्रणाम करते हुए इस मन्त्र का उच्चारण करे |

ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।

त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्‌॥

पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः

इसके बाद आचमन करें

पुष्प, चम्मच या अंजुलि से एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए

ॐ केशवाय नमःऔर फिर एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए

ॐ नारायणाय नमः

फिर एक तीसरी बूंद पानी की मुंह में छोड़िए और बोलिए

ॐ वासुदेवाय नमः

फिर ॐ हृषिकेशाय नमः कहते हुए हाथों को खोलें और अंगूठे के मूल से होंठों को पोंछकर हाथों को धो लें। पुनः तिलक लगाने के बाद प्राणायाम व अंग न्यास आदि करें। आचमन करने से विद्या तत्व, आत्म तत्व और बुद्धि तत्व का शोधन हो जाता है तथा तिलक व अंग न्यास से मनुष्य पूजा के लिए पवित्र हो जाता है |

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आचमन करने के पश्चात आंखें बंद करे और अपने मन को स्थिर करने का प्रयास करे इसके लिए आप  तीन बार गहरी सांस लीजिए | इसे प्राणायाम कहा जाता है, यह बहुत ही आवश्यक है, जिससे  भगवान के साकार रूप का ध्यान किया जा सके |

अब हाथ में पुष्प, अक्षत और थोड़ा जल लेकर स्वतिनः इंद्र वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए परम पिता परमात्मा को प्रणाम करे |

संकल्प

अब पूजा का संकल्प ले, प्रत्येक पूजा में संकल्प प्रधान होता है, संकल्प लेने के लिए हाथ में अक्षत, पुष्प और जल ले लीजिए | कुछ द्रव्य भी ले लीजिए | द्रव्य का अर्थ है कुछ धन | ये सब हाथ में लेकर संकल्प मंत्र को बोलते हुए संकल्प कीजिए कि मैं अमुक व्यक्ति अमुक स्थान व समय पर अमुक देवी-देवता की पूजा करने जा रहा हूं जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हों | सबसे पहले गणेशजी व गौरी का पूजन कीजिए | उसके बाद वरुण पूजा यानी कलश पूजन करनी चाहिए |

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अब हाथ में थोड़ा सा जल लीजिए और आह्वान व पूजन मंत्र बोलिए और पूजा सामग्री चढ़ाइए | इसके बाद नवग्रहों का पूजन कीजिए | हाथ में अक्षत और पुष्प ले लीजिए और नवग्रह स्तोत्र बोलिए | अब भगवती षोडश मातृकाओं का पूजन किया जाता है | हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प लीजिए | सोलह माताओं को नमस्कार कर लीजिए और पूजा सामग्री चढ़ा दीजिए |

सोलह माताओं की पूजा के बाद रक्षाबंधन होता है, रक्षाबंधन विधि में मौली लेकर भगवान गणपति पर चढ़ाइए और फिर अपने हाथ में बंधवा लीजिए और तिलक लगा लीजिए | अब आनंदचित्त से निर्भय होकर महालक्ष्मी की पूजा प्रारंभ कीजिए।

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महालक्ष्मी की पूजा

माँ लक्ष्मी जी की पूजा के लिए वेदों में कई महत्वपूर्ण मन्त्र दिये गये हैं | ऋग्वेद में एक जगह माँ लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए निम्न मंत्र का उल्लेख किया गया है |

धनमग्निर्धनं वायुर्धनं सूर्यो धनं वसुः।

धनमिन्द्रो बृहस्पतिर्वरुणं धनमस्तु ते।।

अश्वदायै गोदायै धनदायै महाधने।

धनं मे जुषतां देवि सर्वकामांश्च देहि मे।।

मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि।

पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः ।।

लक्ष्मी जी की पूजा करते वक़्त साफ़-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है | दीपावली के शुभ अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा के बाद दीपक पूजन करें, इसके लिये तिल के तेल के सात, ग्यारह, इक्कीस अथवा ज्यादा दीपक प्रज्जवलित कर एक थाली में रखकर पूजा करें |

दीपक पूजन के बाद घर की महिलायें अपने हाथ से सोने-चांदी के समस्त आभूषण इत्यादि को मां लक्ष्मी को अर्पित करती अगले दिन स्नान के बाद विधि-विधान से पूजा के बाद आभूषण एवं सुहाग की अन्य सामग्री जो अर्पित की थी, उसे मां लक्ष्मी का प्रसाद समझकर स्वयं प्रयोग करें | मान्यता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहती है ।

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लक्ष्मी जी की आरती

ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता

तुम को निश दिन सेवत, हर विष्णु विधाता….

ओम जय लक्ष्मी माता…।।

उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता

सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता

ओम जय लक्ष्मी माता…।।

दुर्गा रूप निरंजनि, सुख सम्पति दाता

जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि सिद्धि धन पाता

ओम जय लक्ष्मी माता…।।

तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभ दाता

कर्म प्रभाव प्रकाशिनी, भव निधि की त्राता

ओम जय लक्ष्मी माता…।।

जिस घर तुम रहती सब सद्‍गुण आता

सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता

ओम जय लक्ष्मी माता…।।

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता

खान पान का वैभव, सब तुमसे आता

ओम जय लक्ष्मी माता…।।

शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता

रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता

ओम जय लक्ष्मी माता…।।

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई नर गाता

उर आनंद समाता, पाप उतर जाता

ओम जय लक्ष्मी माता…।।

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