गोवर्धन पूजा क्या होती है?

गोवर्धन पूजा से सम्बंधित जानकारी (Govardhan Puja)

हिन्दू धर्म में दिवाली का विशेष महत्व होता है | दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का त्यौहार मनाया जाता है |  जिसमें गोवर्धन पूजा बहुत ही श्रध्दा के साथ की जाती है | गोवर्धन पूजा का त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है| हिंदू धर्म ग्रंथों में गोवर्धन पूजा के बारें में विस्तार से बताया गया है| इस वर्ष दिवाली 27 अक्टूबर को मनाई जाएगी, इसके अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। गोवर्धन पूजा करने के लिए गाय के गोबर का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि इसमें गोवर्धन गाय के गोबर से ही बनाये जाते है, उसके बाद उनकी पूजा की जाती है | गोवर्धन पूजा क्या होती है, और यह पूजा कब और क्यों मनाई जाती है ? इसके बारें में आपको इस पेज पर विस्तार से बता रहे है|

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गोवर्धन पूजा क्या होती है?

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गोवर्धन पूजा कब है (Govardhan Puja Date)

गोवर्धन पूजा 2019 में कार्तिक मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि में 28 अक्टूबर 2019 को है|

गोवर्धन पूजा 2019 शुभ मुहूर्त (Govardhan Puja 2019 Subh Muhurat)

गोवर्धन पूजा मुहूर्तशाम 3 बजकर 24 मिनट से शाम 5 बजकर 36 तक
प्रतिपदा तिथि प्रारंभसुबह 09.08 मिनट से (28 अक्टूबर 2019)
प्रतिपदा तिथि समाप्तशाम 6.13 मिनट तक (29 अक्टूबर 2019)

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गोवर्धन पूजा क्या है  (Govardhan Puja Kya Hai)

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दिवाली के अगले दिन घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन जी की मूर्ति बनाकर उनका पूजन करते हैं|  गोवर्धन पूजा  के इस त्यौहार को ‘अन्नकूट’ भी कहा जाता है। इसके बाद ब्रज के साक्षात देवता माने जाने वाले भगवान गिरिराज को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अन्नकूट का भोग लगाते हैं| गाय- बैल आदि पशुओं को स्नान कराकर फूल माला, धूप, चन्दन आदि से उनका पूजन किया जाता है| गायों को मिठाई का भोग लगाकर उनकी आरती उतारी जाती है |  कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को भगवान के लिए भोग व अपनें सामर्थ्य के अनुसार अन्न से बने कच्चे-पक्के भोग, फल-फूल, अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थ जिन्हें छप्पन भोग कहते हैं, उनका भोग लगाया जाता है|  फिर सभी सामग्री अपने परिवार व मित्रों को वितरण कर प्रसाद ग्रहण किया जाता है|

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गोवर्धन पूजा विधि (Govardhan Puja Vidhi)

  • गोवर्धन पूजा के दिन सबसे पहले पूजा करने वाले व्यक्ति को स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करने चाहिए।
  • इसके बाद गाय को गोबर से गोवर्धन की मूर्ति बनाएं। इसके बाद भगवान गिरिराज का स्मरण करते हुए अन्नकूट का भोग लगाएं।
  • इस दिन गाय और बैलों का विशेष पूजन किया जाता है, इसलिए गाय और बैल को स्नान कराकर उनका धूप, दीप, फूल और मालाओं से पूजन करें।
  • इसके बाद उनकी आरती उतारें और उन्हें मिठाई का भोग लगाएं।
  • अंत में सभी को वही मिठाई प्रसाद के रूप में वितरण करें।

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गोवर्धन पूजा का महत्व (Importance Of Govardhan Puja)

मान्यताओं के मुताबिक, बताया जाता है कि, “एक बार भगवान श्रीकृष्ण अपने सखाओं, गोप-ग्वालों के साथ गाएं चराने गए इसके बाद वह चलते-चलते गोवर्धन पर्वत की तराई में जा पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि, नाच-गाकर खुशियां मनाई जा रही हैं। जब श्रीकृष्ण ने इसका कारण पूछा तो गोपियों ने कहा- आज मेघ व देवों के स्वामी इंद्र का पूजन होगा। पूजन से प्रसन्न होकर वे वर्षा करते हैं, जिससे अन्न पैदा होता है तथा ब्रजवासियों का भरण-पोषण होता है। तब श्रीकृष्ण बोले- इंद्र में क्या शक्ति है? उससे अधिक शक्तिशाली तो हमारा गोवर्धन पर्वत है। इसी के कारण वर्षा होती है। इसके बाद गोकुल के सभी श्रीकृष्ण की बात मानकर गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी शुरू कर दी थी |

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यह बात जाकर नारद ने देवराज इंद्र को बता दी। यह सुनकर इंद्र को बहुत क्रोध आया और इंद्र ने मेघों को आज्ञा दी कि, वे गोकुल में जाकर मूसलधार बारिश करें। सभी लोग भारी वर्षा से भयभीत हो गए| तभी श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठिका ऊँगली पर उठाकर सभी गोकुल वासियों को इंद्र के कोप से बचाया| जब इंद्र को ज्ञात हुआ, कि श्रीकृष्ण भगवान श्रीहरि विष्णु के अवतार हैं, तो इन्द्रदेव अपनी मुर्खता पर बहुत लज्जित हुए तथा भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा याचना की| तबसे आज तक गोवर्धन पूजा बड़े श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ की जाती है|

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यहाँ  हमनें आपको गोवर्धन पूजा के विषय में बताया, यदि इस जानकारी से सम्बन्धित आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्न आ रहा है, अथवा इससे सम्बंधित अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो कमेंट बाक्स के माध्यम से पूँछ सकते है,  हम आपके द्वारा की गयी प्रतिक्रिया और सुझावों का इंतजार कर रहे है |

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