Reserve Bank of India के गवर्नर के अधिकार !

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के गवर्नर के अधिकार !

वर्तमान समय में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर का पद बहुत सम्मानजनक हैं , सम्पूर्ण देश में इसके बाईस क्षेत्रीय कार्यालय हैं, यह अधिकतर सभी राज्यों की राजधानी में स्थित है, इसके मुख्य अधिकार है- मौद्रिक प्राधिकारी संबंधी अधिकार,मुद्रा जारीकर्ता का अधिकार,विदेशी मुद्रा प्रबंधक का अधिकार,वित्तीय प्रणाली का विनियामक और पर्यवेक्षक का अधिकार है, यह भारत सरकार के बैंकर के रूप में कार्य करते है, यह सम्पूर्ण भारत के बैंकिंग सिस्टम को निर्देशित करने का कार्य करता है, आज हम इस पेज पर Reserve Bank of India गवर्नर के अधिकार ! के बारें में आपको इस पेज पर विस्तार से बता रहें है |

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 मौद्रिक नीति संबंधी अधिकार

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के माध्यम से  मौद्रिक नीति का निर्धारण किया जाता है, इन्ही की देख-रेख में इसका कार्यवाहन किया जाता है, इनका मुख्य उद्देश्य भारत में मूल्य स्थिरता बनाये रखना होता और उत्पादन के क्षेत्र में कंपनी को आसानी से ऋण की सुविधा प्रदान करना है, भारतीय संविधान में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर को मौद्रिक प्राधिकरण संबंधी अधिकार प्रदान किये गए हैं |

मुद्रा जारी करने का अधिकार

सम्पूर्ण देश में मुद्रा जारी करने का अधिकार केवल भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के पास है, विनमय करने का अधिकार भी गवर्नर के पास हैं, चलने योग्य न पाए जाने पर मुद्रा को नष्ट करने का अधिकार आर बी आई गवर्नर को प्राप्त है, इनका मुख्य उद्देश्य भारतीय जनता को सही मुद्रा प्रदान करना तथा बेकार नोटों को बदल कर दूसरी नोट  प्रदान करने का कार्य भी रिजर्व बैंक करता है, यह जाली नोटों की सही पहचान के लिए गाइड लाईन जारी करते है, जिससे आम नागरिक धोखे- बाजी से बच सके |

विदेशी मुद्रा का प्रबंधन करना

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर को विदेशी मुद्रा के प्रबंधन का अधिकार प्राप्त है, विदेश से होने वाले लेन-देन को सुविधा प्रदान करना इसका मुख्य कार्य हैं, विदेशी पूजीं को अपने कोष में सरंक्षित करना और उसकी सीमा तय करना भी इन्ही का कार्य है, विदेशी मुद्रा का विकास करना और उसे सुचारु रूप से बनाये रखना है,  आवश्यकता पड़ने पर विदेशी मुद्रा को बाजार में निवेश करना भी इसी का कार्य है, इस प्रकार से विदेशी मुद्रा सम्बन्धी अधिकार भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर को भारतीय सविंधान से प्राप्त है |

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भारतीय वित्तीय प्रणाली का पर्यवेक्षक का अधिकार

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर को भारतीय बैंक के लिए दिशा- निर्देश तैयार करने का अधिकार हैं, यह सभी बैंको के लिए मानक का निर्धारण करता है और मानक न पूरा करने पर बैंक के ऊपर अर्थ दंड लगता है, इसका मुख्य उद्देश्य देश के अंदर बैंकिंग व्यवस्था को संचालित करना और भारतीय नागरिकों के विश्वास को बनाये रखना है, नागरिकों द्वारा शिकायत करने पर यदि बैंक कार्यवाही नहीं करता हैं, तो  भारतीय रिजर्व बैंक सम्बंधित बैंक से कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है |

अन्य अधिकार

भारतीय रिजर्व बैंक राष्ट्रहित में लिए गए निर्णय को पूरा करने के उद्देश्य को प्रोहत्साहन प्रदान करता है, इसके अतिरिक्त यह केंद्र सरकार और राज्य सरकार के लिए यह वाणिज्य बैंक की भूमिका भी निभाता है, इसे भारत सरकार का बैंकर कहा जाता हैं, यह सभी सरकारी बैंको और निजी बैंको के लिए यह बैंकर का कार्य करता है, इस प्रकार से यह बैंको को ऋण देता है और बैंक के वित्तीय लेन-देन  का विवरण की जानकारी भी मांगता है, किसी धोखे-बाजी पर यह जाँच भी करता है और यदि उसमे किसी बैंक कर्मचारी को सम्मिलित पाया जाता है, तो उस बैंक कर्मचारी पर बैंक के नियमानुसार कार्यवायी करता है |

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