Money Laundering (मनी लॉन्ड्रिंग) क्या है?

मनी लॉन्ड्रिंग के बारे में जानकारी (INFORMATION ABOUT MONEY LAUNDERING)

भारत में भ्रष्टाचार के कारण मनी लॉन्ड्रिंग के केस उजागर हो रहे है, जिससे भारत को आर्थिक रूप से बहुत ही हानि का सामना करना पड़ है | मनी लॉन्ड्रिंग शब्द का प्रयोग अवैध तरीके से कमाए गए धन को वैध बनाने के लिए किया जाता है | इस प्रकार के धन का सरकार के पास कोई भी लेखा-जोखा नहीं होता है, सरकार ने इसे रोकने के लिए कई कड़े नियम बनाये है | इस पेज पर MONEY Laundering (मनी लॉन्ड्रिंग) क्या है, भारत में मनी-लॉन्ड्रिंग के लिए कानून के विषय में बताया जा रहा है |

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मनी लॉन्ड्रिंग शब्द की उत्पत्ति (ORIGIN OF THE WORD MONEY LAUNDERING)

‘मनी लॉन्ड्रिंग’ शब्द की उत्पत्ति संयुक्त राज्य अमेरिका में हुई है | अमेरिका में माफिया अन्य लोगों से जबरन वसूली करते और अवैध तरीके से जुआ, स्मगलिंग से बहुत अधिक मात्रा में धन को एकत्रित करते थे | इसके बाद वह धन वैध तरीके से सरकार के सामने पेश करते थे | इसके लिए वहां पर मनी लॉन्ड्रिंग शब्द का प्रयोग किया जाता था |

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मनी लॉन्ड्रिंग शब्द का प्रयोग पहली बार कब हुआ (WHEN WAS THE WORD “MONEY LAUNDERING” FIRST USED)?

1980 के दशक में संयुक्त राज्य अमेरिका में अवैध धन को बहुत ही बड़े स्तर में वैध रूप में परिवर्तित किया जाने लगा | इस प्रकार के धन के लिए अमेरिकी सीनेट में ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ शब्द का प्रयोग किया गया |

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भारत में मनी-लॉन्ड्रिंग (MONEY LAUNDERING IN INDIA)

भारत में भी अवैध धन को वैध बनाने का कार्य चोरी- छुपे होता रहता था | लेकिन 1990 के दशक में  “मनी लॉन्ड्रिंग” को हवाला लेन-देन शब्द के रूप में जाना जाता है इस समय भारत में कई बड़े नेताओं के नाम हवाला लेन-देन में सामने आये जिससे मनी लॉन्ड्रिंग शब्द भारत में भी प्रचलित हो गया |

मनी लॉन्ड्रिंग की परिभाषा (DEFINITION OF MONEY LAUNDERING)

अवैध रूप से अर्जित की गयी आय को वैध रूप में परिवर्तित करने को मनी लॉन्ड्रिंग कहा जाता है | इसमें वैध रूप से परिवर्तित हो चुकी आय के स्रोत को जाँच एजेंसी भी पता कर पाने में असफल होती है | जो व्यक्ति इस प्रकार से अपने अवैध धन को वैध करता है उसे “लाउन्डरर” (THE LAUNDERER) कहा जाता है |

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मनी लॉन्ड्रिंग के चरण (STEPS OF MONEY LAUNDERING)

मनी लॉन्ड्रिंग के मुख्यतः तीन चरण होते है |

  1. प्लेसमेंट (PLACEMENT)
  2. लेयरिंग (LAYERING)
  3. एकीकरण (INTEGRATION)

प्लेसमेंट (PLACEMENT)

मनी लॉन्ड्रिंग का यह पहला चरण है, इसमें अवैध रूप से अर्जित करने वाला व्यक्ति गलत तरीकों से आय को जमा करता है |

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लेयरिंग (LAYERING)

इस चरण में वह व्यक्ति अपनी असली आय को छिपा लेता है | इसके लिए वह धन का आवागमन कम या गलत दिखाता है | वह अपने धन को बांड, स्टॉक, और ट्रैवेलर्स चेक या विदेशों में छिपा देता है | विश्व में कई देश है जो मनी लॉन्ड्रिंग में सहयोग नहीं करते है ऐसे लोग इसी देश में इस प्रकार के धन को छिपाते है, जैसे स्विट्जरलैंड आदि |

एकीकरण (INTEGRATION)

इस चरण में बाहर या अन्य स्रोतों से खपाया गया धन पुनः उस व्यक्ति के पास वैध रूप से आ जाता है | यह धन किसी कंपनी में निवेश,अचल संपत्ति खरीदने, लक्जरी सामान खरीदने आदि के माध्यम से वापस आता है |

मनी लॉन्ड्रिंग के तरीके (WAYS OF MONEY LAUNDERING)

मनी लॉन्ड्रिंग करने वाला व्यक्ति अपने धन को वैध दिखाने के लिए कई फर्जी कंपनी बनाता है, इस प्रकार की कंपनियों को शैल कंपनियां” भी कहा जाता है | इन कंपनियों की बैलेंस शीट में करोड़ो का लेन- देन दिखाया जाता है, जोकि वास्तविक रूप से होता ही नहीं है | यह इनकम टैक्स नहीं भरते है | यदि कोई इनकी जाँच करता है, तो उन्हें गलत जानकारी दी जाती है | यह कंपनी केवल कागज पर ही चलती है, वास्तविक रूप से इनका अस्तित्व नहीं होता है | अन्य तरीकों में व्यक्ति उस अवैध आय से चल- अचल संपत्ति खरीदते है, जिनकी कीमत बहुत ही कम दिखाई जाती है, जिससे टैक्स को बचाया जा सके |

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भारत में मनी-लॉन्ड्रिंग के लिए कानून

भारत में मनी-लॉन्ड्रिंग के लिए कानून वर्ष 2002 में बनाया गया इसे मनी-लॉन्ड्रिंग निरोध अधिनियम, 2002 (PREVENTION OF MONEY LAUNDERING ACT, 2002) के नाम से पारित किया गया था | अभी तक इस अधिनियम में तीन संसोधन किये जा चुके है | यह संसोधन 2005, 2009 और 2012 में किये गए है | इस अधिनियम में अवैध लेन- देन को कानून के दायरे में लाया गया है |

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यहाँ पर हमनें आपको मनी लॉन्ड्रिंग के विषय में जानकारी उपलब्ध करायी है, यदि इस जानकारी से सम्बन्धित आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्न आ रहा है, अथवा इससे सम्बंधित अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो कमेंट बाक्स के माध्यम से पूँछ सकते है,  हम आपके द्वारा की गयी प्रतिक्रिया और सुझावों का इंतजार कर रहे है |

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