पुलिस अधिनियम 1861

हमारे यहाँ पुलिस भिन्न – भिन्न राज्य सरकारों के तहत रहती है तथा भिन्न – भिन्न राज्य विधान मंडल द्वारा पुलिस से संबंधित नियम बनाये जाते हैं । पुलिस के लिए कुछ केंद्रीय कानून भी देश भर की उपलब्ध है । यह नियम पूरे भारत में अधिनियमित होता है, इसे पुलिस अधिनियम 1861 कहा गया है । इस अधिनियम का मकसद पुलिस को फिर से गठन करना और जुर्मों को निर्धारित करने तथा उनका पता लगाने के लिए उसे और पुलिस को अधिक दक्ष यंत्र तैयार करना है ।

पुलिस अधिनियम 1861

इस अधिनियम के रहते हुए भी भिन्न – भिन्न राज्यों द्वारा अपनी पुलिस को अधिकार कर्तव्य प्रदान करने के लिए अपने स्वयं के विधानमंडल में पुलिस से जुड़ा अधिनियम बनाये गए हैं, जैसे मध्यप्रदेश में मध्यप्रदेश पुलिस मैनुअल, तमिलनाडु में तमिलनाडु जिला पुलिस अधिनियम, उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश पुलिस अधिनियम पारित होता है ।

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Table of Contents

इस अधिनियम के अंतर्गत पुलिस अधिनियम 1861 के अंतर्गत भर्ती किए गए सभी व्यक्ति पुलिस माने जाएंगे । इसका मतलब यह है कि इस अधिनियम के तहत जितने भी व्यक्तियों को पुलिस बल के लिए भर्ती किया जाता है, वे सभी पुलिस अर्थ के तहत आते हैं ।

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पुलिस महानिरीक्षक

अधिनियम के माध्यम से पुलिस महानिरीक्षक का पद बताया जाता है । अधिनियम की धारा 4 के तहत,

“साधारण पुलिस ज़िले में सर्वत्र पुलिस का प्रशासन एक अधिकारी में, जो पुलिस महानिरीक्षक कहलायेगा और ऐसे उपमहानिरीक्षक और सहायक महानिरीक्षक अधिकारी में जो पुलिस महानिरीक्षक कहलाएगा और ऐसे उपमहानिरीक्षक और सहायक महानिरीक्षक में जो ने राज्य सरकार ठीक समझे निहित होगा ।

जिले के मजिस्ट्रेट की स्थानीय अधिकारिता में सर्वत्र पुलिस का प्रशासन ऐसे मजिस्ट्रेट के साधारण नियंत्रण निदेशन के अधीन एक जिला अधीक्षक और ऐसे सहायक जिला अधीक्षकों में जिन्हें राज्य सरकार आवश्यक समझे निहित होगा ।”

महानिरीक्षक का अधिकार

पुलिस महानिदेशक को व सभी अधिकार मिलती है, जो अधिकार एक साधारण मजिस्ट्रेट को मिलती है, लेकिन वह इन अधिकारों का प्रयोग राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर स्थापित मर्यादाओं के अंतर्गत  करेगा ।

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पुलिस अधिकारियों को प्रमाण पत्र

अधिनियम की धारा 8 के तहत पुलिस बल की तैनाती के दौरान महानिरीक्षक जैसे अन्य अधिकारी जिसे महानिदेशक चुने, वहां पुलिस अधिकारियों को एक प्रमाण पत्र देते हैं । इस प्रमाण पत्र को प्राप्त करने वाला पुलिस की अधिकार और विशेषाधिकार के बारे में जानता है ।

जब प्रमाण पत्र में अंकित व्यक्ति किसी वजह से पुलिस अधिकारी के पद पर नहीं रहता है, तब ऐसा प्रमाण पत्र अप्रभावी हो जाता है या फिर प्राप्त करने वाला पुलिस अधिकारी समर्थ पुलिस अधिकारी को वह अपना प्रमाण पत्र सौंप देगा ।

अपर अधिकारियों को पदच्युत करने की अधिकार

किसी भी समय अधीनस्थ पंक्तियों के किसी अधिकारी को पदच्युत, निलंबित, अवनत कर पुलिस महानिरीक्षक उपमहानिरीक्षक सहायक महानिरीक्षक जिला अधीक्षक को करने की शक्ति होती हैं, अगर ऐसे अधीन अधिकारी जो अपने कर्तव्यों के पालन में शिथिल उपेक्षावान पाए जाएं या उस पद के लिए योग्य न समझे जाएं ।

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इस अधिकार का प्रयोग संविधान के अनुच्छेद 311 के सम्बन्ध अधिनियम के तहत राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर जो नियम गठित किये जाते हैं, उन नियमों के तहत रहते हुए इस अधिकार का उपयोग किया गया है ।

इस अधिकार के तहत अपने कर्तव्य का मनोयोग या उपेक्षा पूर्ण रीति से निर्वहन करने पर दंड भी दिया जा सकता है । वह दंड निम्न प्रकार हो सकता है

  • 1 मार्च के वेतन से और अधिक किसी रूपये का जुर्माना ।
  • हमेशा के लिए वेतन से वंचित करना ।
  • विशिष्ट या विशेष उपलब्धि से किसी पद से हटाना ।
  • कोई भी पुलिस अधिकारी 2 माह पूर्व सूचना दिए बिना अपने पद को नहीं छोड़ सकता है |
  • किसी भी स्तर का किसी भी पोस्ट का पुलिस अधिकारी जिला अधीक्षक या वह अधिकारी जिसे ऐसी आज्ञा देने के लिए अधिकृत किया जाए, ऐसे अधिकारी को सूचना दिए बिना किसी भी पोस्ट का पुलिस अधिकारी अपना पद छोड़ नहीं सकता है, उसे 2 माह पूर्व का सूचना पत्र देना होगा ।

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पुलिस अधिकारी को किसी अन्य नियोजन में नहीं लगाए जाना

अधिनियम की धारा 9 के तहत पुलिस महानिरीक्षक की अनुमति के बिना पुलिस अधिकारियों को इस अधिनियम के उपयोग के अतिरिक्त किसी अन्य नियोजन में नहीं प्रयोग किया जा सकता है, जैसा कि हम जानते हैं शिक्षा विभाग में कार्य करने वाले शिक्षकों को बहुत से अन्य प्रयोजनों के तहत लगा दिया जाता है, लेकिन पुलिस अधिकारियों को किसी अन्य प्रयोजन में तब तक नहीं बुलाया जा सकता जब तक महानिरीक्षक की अनुमति नहीं मिल जाती है ।

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व्यक्तिगत खर्च पर नियोजित अतिरिक्त पुलिस अधिकारी

अधिनियम की धारा 13 के तहत पुलिस महानिरीक्षक या किसी उपमहानिरीक्षक या सहायक महा निरीक्षक या जिला अधीक्षक के लिए जनपद के मजिस्ट्रेट के सामान्य निर्देशन के तहत रहते हुए या प्रणाली पूर्ण होगा कि उसकी आवश्यकता प्रस्तुत करने वाले किसी व्यक्ति के आवेदन पर सामान्य पुलिस जिले के भीतर किसी जगह पर शांति बनाने के लिए और ऐसे समय के लिए जो उपयुक्त माना जाए पुलिस अधिकारियों की कोई अन्य संख्या प्रतिनियुक्त कर दे ऐसा  पुलिस बल अन्यतः जिला अधीक्षक के निर्देशों  के तहत होगा और उसका खर्चा आवेदन करने वाले व्यक्ति पर होगा ।

इसका मतलब यह है कि कोई व्यक्ति किसी जगह विशेष पर शांति बनाने के उद्देश्य से पुलिस बल को नियोजित करने हेतु कोई भी व्यक्ति पुलिस अधीक्षक को आवेदन दे सकता है, लेकिन इस नियोजन का खर्चा आवेदन करने वाले व्यक्ति से लिया जाएगा ।

पुलिस अधिकारी के कर्तव्य

  • अधिनियम की धारा 23 के तहत  सभी पुलिस अधिकारी का यह कर्तव्य होता है कि वहां किसी सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से उसे प्रणाली पूर्ण दिए गए सब निर्देशों और वारंटो का हमेशा पालन को  पूरा  करें ।
  • लोक शांति को प्रभावित करने वाला छिपे हुए बातों को एकत्र करना करें । सूचना करें, जुर्म लोक न्यूसेंस के दूर करने का उपाय करें । अपराधियों को बताएं और अदालत के समक्ष लाए गए उन सभी लोगों को पकड़े जिन्हें पकड़ने के लिए वह वैधता अधिकृत है और जिन्हें पकड़ने के लिए पर्याप्त सबूत है |
  • सभी पुलिस अधिकारी के लिए इस धारा में उल्लेखित समारोह में से किसी के लिए किसी मदिरालय जुआघर, भ्रष्ट व्यक्तियों के समागम के अतरिक्त जगह में बिना वारंट के जाना और निरीक्षण करना प्रणाली पूर्ण होगा ।
  • पुलिस पद पर न रहने के कारण अपना प्रमाण पत्र एवं पुलिस कर्तव्य को निभाने के लिए दी गई सभी सामग्री को वापस न लौटने के कारण दिया जाने वाला दंड

अधिनियम की धारा 28 के तहत

इस अधिनियम के तहत भर्ती हुआ कोई व्यक्ति अगर पुलिस पद पर नहीं रहता है तो उसे अपने कर्तव्यों को पालन करते हुए दिया गया प्रमाण पत्र एवं सभी सामग्री जो कर्तव्य के पालन के लिए आवश्यक थी, उस सामग्री को फिर से लौटाना होगा । यदि कोई व्यक्ति वह सामग्री नहीं लौटता है तो उस व्यक्ति को 6 माह के कारावास से दंडित किया जाएगा ।

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पुलिस अधिकारियों को दी जाने वाली शस्तियां (दंड)

इस अधिनियम के तहत पुलिस अधिकारियों को अपने कर्तव्यों के किसी दुरुपयोग सक्षम अधिकारी के माध्यम से बनाए हुए किसी नियम या विनियम या दिए गए प्रणाली पूर्ण निर्देश को साशय तोडना या आशा करने का अपराधी है, जो अपने पद के कर्तव्यों से बिना अनुमति के बिना 2 माह की समय के पूर्व सूचना दिए पद त्यागता है, छुट्टी पर गैरहाजिर होने पर ऐसी छुट्टी के अवसान पर बिना उचित कार्य के कर्तव्य पर हाजिर नहीं होता है ।

यह जो बिना आदेश देने का अधिकार के अपने पुलिस कर्तव्यों से अलग किसी योजना में लगता है यह जो कायरता का अपराधी है या जो अपनी अच्छी तरह से की जाने वाली रक्षा के किसी व्यक्ति के प्रति अवैध शारीरिक हिंसा करता है, मजिस्ट्रेट के समक्ष अपराध सावित होता है तो  3 माह का वेतन से असीम शास्ति के 3 माह के असीम काल समय के लिए कठोर मेहनत सहित या रहित कारावास या दोनों से दंडित होगा ।

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पुलिस अधिकारी को डायरी रखना होगा

सभी पुलिस थाने के भार साधक पदाधिकारी का यह कर्तव्य होता है कि वह इस प्रालेख में जो राज्य सरकार समय-समय पर उचित करें एक सामान्य डायरी रखें और करने वाले सब परिवादियों और अपराधों को, गिरफ्तार करने वाले सभी व्यक्तियों के नामों को, परिवादियों के नामों को उनके खिलाफ आरोपित आरोपों को,और अभिकर्ता को यह संपत्ति को जो उनके कब्जे से अधिक दी गई है,उन साक्षियों के नामों को जिन की परीक्षा दी जाती है, उसमें उल्लेखित करें । सभी  जिले के मजिस्ट्रेट ऐसी डायरी को मंगवाने और उसका निरीक्षण करने हेतु उनको स्वतंत्र अधिकार हैं ।

इस अधिनियम के तहत अधिकतर अधिकार पुलिस को नियंत्रित करने के लिए जिले के कार्य का पालन करने वाले प्रधान को दी जाती हैं । प्रयास किया जाता है कार्यपालक प्रधान अपने विचार से लोक शांति बनाने तथा राज्य के नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास कर सकें तथा उनके अधिकारों की रक्षा कर सकें ।

भिन्न – भिन्न राज्यों द्वारा इस अधिनियम के तहत अलग – अलग अधिनियम व नियम बना लिए जाते है लेकिन फिर भी इस अधिनियम का महत्व सबसे अधिक है क्योंकि यह अधिनियम एक तरह से दिशा निर्देश देता है ।

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इस लेख में हमने आप को पुलिस अधिनियम 1861 के विषय में विस्तार से जानकारी दी है अगर आप के मन में इस लेख से संबंधित कोई प्रश्न हैं तो कमेंट के द्वारा पूछ सकते हैं हम आप के द्वारा की प्रतक्रिया का आदर करेगें |

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